परिक्षा पर शायरी

परिक्षा पर शायरी

परिक्षा पर शायरी कैसी हैं आज़माईशें कैसा ये इमतिहान हैमेरे जुनूँ के वास्ते हिजर की एक रात बसअफ़ीफ़ सिराज हम तो तेरी कहानी लिख आएतूने लिखा है इमतिहान में क्याज़िया ज़मीर वहशतें इशक़ और मजबूरीक्या किसी ख़ास इमतिहान में हूँख़ुरशीद रब्बानी दिए बुझाती रही दिल बुझा सके तो बुझाएहवा के सामने ये इमतिहान रखना हैहुस्न …

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