चाँद पर शाइरी

प्यार की शाइरी

दिल धड़कने का सबब याद आयावो तरी याद थी अब याद आयानासिर काज़मी करूँगा क्या जो मुहब्बत में हो गया नाकाममुझे तो और कोई काम भी नहीं आताग़ुलाम मुहम्मद क़ासिर तेरे इशक़ की इंतिहा चाहता हूँमरी सादगी देख क्या चाहता हूँअल्लामा इक़बाल तुमको आता है प्यार पर ग़ुस्सामुझको ग़ुस्से पे प्यार आता हैअमीर मीनाई इशक़ …

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