बग़ावत पर शाइरी

बग़ावत पर शाइरी

मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत कामैं चुप रहूं तो बड़ी बेबसी सी होती हैबशीर बदर नहीं है अरे ये बग़ावत नहीं हैहमें सर झुकाने की आदत नहीं हैनीरज गोस्वामी हर शख़्स सर पे कफ़न बांध के निकलेहक़ के लिए लड़ना तो बग़ावत नहीं होतीनामालूम मिट्टी से बग़ावत ना बग़ावत से गुरेज़ांहम सहमे हुए …

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