ज़िन्दगी पर शायरी

ग़ुरूर / घमंड पर शायरी

ग़ुरूर / घमंड पर शायरी आसमां इतनी बुलंदी पे जो इतराता हैभूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता हैवसीम बरेलवी शोहरत की बुलंदी भी पल-भर का तमाशा हैजिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती हैबशीर बदर अदा आई जफ़ा आई ग़रूर आया हिजाब आयाहज़ारों आफ़तें लेकर हसीनों पर शबाब आयानूह नार्वे वो …

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