किसी को जलाने की एटीट्यूड शायरी

पाखंड(मुनाफ़कत)पर शायरी

पाखंड (मुनाफ़कत) पर शायरी

मुनाफ़क़त का निसाब पढ़ कर मोहब्बतों की किताब लिखनाबहुत कठिन है ख़िज़ां के माथे पे दास्तान-ए-गुलाब लिखनामुहसिन नक़वी۔तुम अब तक मुनाफ़िक़ दिलों में रही होमेरे दिल की आब-ओ-हवा मुख़्तलिफ़ हैएम-ए अबदुल्लाह۔सीख थोड़ी मुनाफ़क़त वर्नालोग दीवार से लगा देंगेज़ीशान साजिद۔अच्छे कपड़े, अच्छा खाना, महंगी जूती, ऊंचा घरकाले दिल और घटिया सोच, सस्ते शौक़, मुनाफ़िक़ लोगअहमद शुऐब۔मुम्किन …

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वादा पर शायरी

वादा पर शायरी

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगेतुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का थादाग़ देहलवी ना कोई वाअदा ना कोई यक़ीं ना कोई उम्मीदमगर हमें तो तेरा इंतिज़ार करना थाफ़िराक़-गोरखपुरी आदतन तुमने कर दिए वादेआदतन हमने एतबार कियागुलज़ार तेरे वादों पे कहाँ तक मेरा दिल-फ़रेब खाएकोई ऐसा कर बहाना मेरी आस टूट जायेफ़ना निज़ामी कानपूरी …

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खुदा पर शायरी

खुदा पर शायरी

वो बुतों ने डाले हैं वस्वसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गयावो पड़ी हैं रोज़ क़यामतें कि ख़्याल-ए-रोज़ जज़ा गयानामालूम ख़ुदा को काम तो सौंपे हैं मैंने सब लेकिनरहे है ख़ौफ़ मुझे वां की बेनियाज़ी कामीर तक़ी मीर ख़ुदा से डरते तो ख़ौफ़-ए-ख़ुदा ना करते हमकि याद बुत से हरम में बका ना करते हमक़लक़ मेरठी …

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flower

इज़्ज़त पर शायरी

शहर-ए-सुख़न में ऐसा कुछ कर इज़्ज़त बन जायेसब कुछ मिट्टी हो जाता है इज़्ज़त रहती हैअमजद इस्लाम अमजद आपकी कौन सी बढ़ी इज़्ज़तमैं अगर बज़म में ज़लील हुआमोमिन ख़ां मोमिन अपने लिए ही मुश्किल हैइज़्ज़त से जी पाना भीअज़ीज़ अंसारी जिसको चाहें बेइज़्ज़त कर सकते हैंआप बड़े हैं आपको ये आसानी हैमाजिद देवबंदी मांगने वालों …

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मदद पर शायरी

मदद पर शायरी

किसी को कैसे बताएं ज़रूरतें अपनीमदद मिले ना मिले आबरू तो जाती हैनामालूम हम चराग़ों की मदद करते रहेऔर इधर सूरज बुझा डाला गयामनीष शुक्ला हमारे ऐब में जिससे मदद मिले हमकोहमें है आजकल ऐसे किसी हुनर की तलाशनातिक़ गुलाव ठी फ़र्ज़ है दरिया दिलों पर ख़ाकसारों की मददफ़र्श सहरा के लिए लाज़िम हुआ सेलाब …

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नैतिकता पर शायरी

नैतिकता पर शायरी

दोस्ती के नए आदाब लिए फिरते हैंलोग अब इतर में तेज़ाब लिए फिरते हैंफ़सीह अल्लाह नक़ीब हम लोग तो अख़लाक़ भी रख आए हैं साहिलरद्दी के इसी ढेर में आदाब पड़े थेख़ालिद मुल्क साहिल बस-कि दुशवार है हर काम का आसां होनाआदमी को भी मयस्सर नहीं इंसां होनामिर्ज़ा ग़ालिब हर शख़्स बना लेता है अख़लाक़ …

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दुआ पर शायरी

दुआ पर शायरी

औरों की बुराई को ना देखूं वो नज़र देहाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर देख़लील तनवीर हया नहीं है ज़माने की आँख में बाक़ीख़ुदा करे कि जवानी तेरी रहे बेदाग़अल्लामा इक़बाल अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जाएगातुम्हें जिसने दिल से भुला दिया उसे भूलने की दुआ करोबशीर बदर आख़िर दुआ …

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इल्म पर शायरी

इल्म पर शायरी

मज़हबी बेहस मैंने की ही नहींफ़ालतू अक़ल मुझमें थी ही नहींअकबर इला आबादी ये इलम का सौदा ये रिसाले ये किताबेंइक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैंजां निसार अख़तर इल्म में भी सुरूर है लेकिनये वो जन्नत है जिसमें हूर नहींअल्लामा इक़बाल लफ़्ज़-ओ-मंज़र में मआनी को टटोला ना करोहोश वाले हो तो हर …

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तकिये पर शायरी

तकिये पर शायरी

फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझको रात-भर रखाकभी तकिया इधर रखा कभी तकिया इधर रखाअमीर मीनाई चलो तकिया तुम्हारे ही सिरहानेवगरना रात-भर झगड़ा करोगीदीपक शर्मा दीप गर भरोसा है हमें अब तो भरोसा तेराऔर तकिया है अगर तेरे ही दर का तकियाइंशा-अल्लाह ख़ां इंशा है ये तकिया तरी अताओं परवही इसरार है ख़ताओं परअलताफ़ हुसैन हाली एक …

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ख़ुद्दारी पर शायरी

रूठ जाने पर शायरी

रूठने पर बेहतरीन शायरी का इंतिख़ाब पढ़ें और पसंद आने पर दोस्तों से साथ शेयर करें मुझको आदत है रूठ जाने कीआप मुझको मना लिया कीजियेजून ईलिया हाय वो लोग हमसे रूठ गएजिनको चाहा था ज़िंदगी की तरहजावेद कमाल रामपूरी ज़रा रूठ जाने पे इतनी ख़ुशामदक़मर तुम बिगाड़ोगे आदत किसी कीक़मर जलालवी ना जाने रूठ …

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