अपनों ने दिया धोखा शायरी

बेवफ़ाई पर शायरी

बेवफ़ाई पर शायरी

इश्क़-ए-रवां की नहर है और हम हैं दोस्तोउस बेवफ़ा का शहर है और हम हैं दोस्तोमुनीर नियाज़ी۔भूलना था तो ये इक़रार किया ही क्यों थाबेवफ़ा तू ने मुझे प्यार किया ही क्यों थानामालूम۔कौन उठाएगा तुम्हारी ये ख़फ़ा मेरे बादयाद की ही बहुत मेरी वफ़ा मेरे बादअमीर मीनाई۔मेरी वफ़ा फ़रेब थी, मेरी वफ़ा पे ख़ाक डालतुझ …

बेवफ़ाई पर शायरी Read More »

वक़्त/ समय पर शायरी

वक़्त/ समय पर शायरी

सदा ऐश दौरां दिखाता नहींगया वक़्त फिर हाथ आता नहींमीर हुस्न वक़्त रहता नहीं कहीं टिक करआदत उस की भी आदमी सी हैगुलज़ार सुबह होती है शाम होती हैउम्र यूँही तमाम होती हैमुंशी अमीर अल्लाह तस्लीम जब आ जाती है दुनिया घूम फिर कर अपने मर्कज़ परतो वापिस लौट कर गुज़रे ज़माने क्यों नहीं आतेइबरत …

वक़्त/ समय पर शायरी Read More »