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ख़ौफ़ पर शायरी

ख़ौफ़ पर शायरी

ख़ौफ़ पर शायरी

ख़ुदा से डरते तो ख़ौफ़-ए-ख़ुदा ना करते हमकि याद बुत से हर्म में बका ना करते हमक़लक़ मेरठी हालात से ख़ौफ़ खा रहा हूँशीशे के महल बना रहा हूँक़तील शिफ़ाई वो बुतों ने डाले हैं वस्वसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख...