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जाड़े पर शायरी

दिसंबर पर शायरी

दिसंबर पर शायरी

दिसंबर की सर्दी है उसके ही जैसीज़रा सा जो छू ले बदन काँपता हैउम्मत शर्मा मय्यत ये साल भी उदासीयां देकर चला गयातुमसे मिले बग़ैर दिसंबर चला गयानामालूम दिसंबर की शब आख़िर ना पूछो किस तरह गुज़रीयही लगता थ...