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जबरदस्ती शायरी

वक़्त/ समय पर शायरी

वक़्त/ समय पर शायरी

सदा ऐश दौरां दिखाता नहींगया वक़्त फिर हाथ आता नहींमीर हुस्न वक़्त रहता नहीं कहीं टिक करआदत उस की भी आदमी सी हैगुलज़ार सुबह होती है शाम होती हैउम्र यूँही तमाम होती हैमुंशी अमीर अल्लाह तस्लीम जब आ जाती ...