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घर की जिम्मेदारी शायरी

सर्दी पर शायरी

सर्दी पर शायरी

अब उदास फिरते हो सर्दीयों की शामों मेंइस तरह तो होता है इस तरह के कामों मेंशुऐब बिन अज़ीज़ ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझहम अपने शहर में होते तो घर गए होतेउम्मीद फ़ाज़ली कुछ तो हवा भी सर्द थी कु...