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घमंड वाली शायरी

ऊँचाई(बुलंदी)शायरी

ऊँचाई (बुलंदी) शायरी

आसमां इतनी बुलंदी पे जो इतराता हैभूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता हैवसीम बरेलवी۔ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहलेख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा किया हैअल्लामा इक़बाल۔ज़रा ये भी तो देख...