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घमंड तोड़ने वाली शायरी

ऊँचाई(बुलंदी)शायरी

ऊँचाई (बुलंदी) शायरी

आसमां इतनी बुलंदी पे जो इतराता हैभूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता हैवसीम बरेलवी۔ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहलेख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा किया हैअल्लामा इक़बाल۔ज़रा ये भी तो देख...

घमंड पर शायरी

घमंड पर शायरी

आसमां इतनी बुलंदी पे जो इतराता हैभूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता हैवसीम बरेलवी शोहरत की बुलंदी भी पल-भर का तमाशा हैजिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती हैबशीर बदर अदा आई जफ़ा आई ग़रूर आया हिजाब आयाहज़ार...

वक़्त/ समय पर शायरी

वक़्त/ समय पर शायरी

सदा ऐश दौरां दिखाता नहींगया वक़्त फिर हाथ आता नहींमीर हुस्न वक़्त रहता नहीं कहीं टिक करआदत उस की भी आदमी सी हैगुलज़ार सुबह होती है शाम होती हैउम्र यूँही तमाम होती हैमुंशी अमीर अल्लाह तस्लीम जब आ जाती ...