Home » गुलजार की शायरी जिंदगी

गुलजार की शायरी जिंदगी

सेहत पर शायरी

सेहत पर शायरी

मरीज़-ए-हिज्र को सेहत से अब तो काम नहींअगरचे सुबह को ये बच गया तो शाम नहींरजब अली बेग सरवर۔बज़ाहिर सेहत अच्छी है जो बीमारी ज़्यादा हैइसी ख़ातिर बुढ़ापे में हवस-कारी ज़्यादा हैज़फ़र इक़बाल۔शाह के है ग़...

अमन(शांति) पर शायरी

अमन (शांति) पर शायरी

अमन में हिस्सा छोड़ चुका हूँएक परिंदा छोड़ चुका हूँअक्स समस्ती पूरी۔अमन की कर ख़ैरात अता मेरे मौलाजंग-ओ-जदल को दूर हटा मेरे मौलासाहिल मुनीर۔कितना पुरअम्न है माहौल फ़सादाद के बादशाम के वक़्त निकलता नही...

नाव/कश्ती पर शायरी

नाव/कश्ती पर शायरी

अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डूबा के देखइक तू ही नाख़ुदा नहीं ज़ालिम ख़ुदा भी हैक़तील शिफ़ाई आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ हैमुम्किन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जायेबह्...

चाँद पर शाइरी

चाँद पर शाइरी

इस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगाआसमाँ पे चांद पूरा था मगर आधा लगाइफ़्तिख़ार नसीम कल चौधवीं की रात थी शब-भर रहा चर्चा तिराकुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिराइबने इंशा ईद का चाँद तुमने देख ल...

बग़ावत पर शाइरी

बग़ावत पर शाइरी

मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत कामैं चुप रहूं तो बड़ी बेबसी सी होती हैबशीर बदर नहीं है अरे ये बग़ावत नहीं हैहमें सर झुकाने की आदत नहीं हैनीरज गोस्वामी हर शख़्स सर पे कफ़न बांध के निकलेहक़ के लिए ल...