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गुलज़ार सैड शायरी

सेहत पर शायरी

सेहत पर शायरी

मरीज़-ए-हिज्र को सेहत से अब तो काम नहींअगरचे सुबह को ये बच गया तो शाम नहींरजब अली बेग सरवर۔बज़ाहिर सेहत अच्छी है जो बीमारी ज़्यादा हैइसी ख़ातिर बुढ़ापे में हवस-कारी ज़्यादा हैज़फ़र इक़बाल۔शाह के है ग़...

आदमी पर शायरी

आदमी पर शायरी

हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमीजिसको भी देखना हो कई बार देखनानिदा फ़ाज़ली वक़्त रहता नहीं कहीं टिक करआदत उस की भी आदमी सी हैगुलज़ार बस-कि दुशवार है हर काम का आसां होनाआदमी को भी मयस्सर नहीं इंसां होन...

झूठे आरोप पर शायरी

झूठे आरोप पर शायरी

तुम मेरे लिए अब कोई इल्ज़ाम ना ढूंढ़ोचाहा था तुम्हें इक यही इल्ज़ाम बहुत हैसाहिर लुधियानवी ऐ दोस्त कहीं तुझपे भी इल्ज़ाम ना आएइस मेरी तबाही में तिरा नाम ना आएहकीम नासिर अपने सर तेरे तग़ाफ़ुल का भी इल्...

नाव/कश्ती पर शायरी

नाव/कश्ती पर शायरी

अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डूबा के देखइक तू ही नाख़ुदा नहीं ज़ालिम ख़ुदा भी हैक़तील शिफ़ाई आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ हैमुम्किन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जायेबह्...