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गुड मॉर्निंग शायरी हिंदी love

Meer Taqi Meer

मीर तक़ी मीर के प्रख्यात अशआर

मीर तक़ी मीर के उर्दू के प्रख्यात कवी हैं। उनकी शाइरी पूरी दुनिया मैं पढ़ी जाती है। वह उर्दू ग़ज़ल के प्रमुख कवियों में से एक थे और उन्हें अक्सर उर्दू भाषा के सर्वश्रेष्ठ कवियों में सबसे बड़े कवी के रूप...

चाय पर शायरी

चाय पर शायरी

हमसे नफ़रत कुछ यूं भी निभाई गईहमारे सामने चाय बना के औरों को पिलाई गईनामालूम۔चाय मेरी ज़िंदगी में लाज़िम है ऐसेआशिक़ को महबूब का दीदार हो जैसेनामालूम ۔पुरतकल्लुफ़ सी महकती वो सुहानी चायअब कहाँ हमको मय...

माफ़ी पर शायरी

माफ़ी पर शायरी

वो करेंगे मेरा क़सूर माफ़हो चुका, कर चुके ज़रूर माफ़नूह नारवी۔ख़ुदा माफ़ करे ज़िंदगी बनाते हैंमरे गुनाह मुझे आदमी बनाते हैंनोमान शौक़۔माफ़ कीजीए गुस्ताख़ियाँ हमारी हैंलबों पे आपके ये तितलियाँ हमारी है...

एक सुन्दर कविता

प्रेमिका के लिए एक सुन्दर कविता

दुआए नीम शबी अपने पाकीज़ा जज़्बों को गवाह बना करअब की बार भी ईद का चांद देखकरमैं दुआ माँगूँ अपने और तुम्हारे साथ कीबस तुम इतना करनाकि जब मेरी आँखों का नमकीन पानीमेरी फैली हथेली पर गिरेतो मेरी दुआए नीम...

याद पर शायरी

याद पर शायरी

याद वाबस्ता है जिसे भूल गया ख़लवत मेंतुम तो हर वक़त मेरे साथ रहा करते होइबरार मुजीब याद का दिल के दरीचे से गुज़र कैसे होतेरी तज्सीम मुकम्मल है मेरी आँखों मेंसदफ़ इक़बाल दिल में ज़ौक़-ए-वस्ल-ओ-याद-ए-या...

झील पर शायरी

झील पर शायरी

वो लाला बदन झील में उतरा नहीं वर्नाशोले मुतवातिर इसी पानी से निकलतेमहफ़ूज़ अलरहमान आदिल सामने झील है झील में आसमाँआसमाँ में ये उड़ता हुआ कौन हैफ़ारूक़ शफ़क़ सूख गई जब आँखों में प्यार की नीली झील क़तील...

हक़ पर शायरी

हक़ पर शायरी

सारी गवाहियाँ तो मेरे हक़ में आ गईंलेकिन मेरा बयान ही मेरे ख़िलाफ़ थानफ़स अंबालवी उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने मेंउधर का लगता रहे और इधर का हो जायेवसीम बरेलवी मैं दे रहा हूँ तुझे ख़ुद से इख़तिला...

Poet: Saleem Javed

हया पर शायरी

हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देनाहसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देनाअकबर इला आबादी हया नहीं है ज़माने की आँख में बाक़ीख़ुदा करे कि जवानी तेरी रहे बेदाग़अल्लामा इक़बाल इशवा भी है शोख़ी भी ...

कागज पर शायरी

कागज पर शायरी

लिख के रख देता हूँ अलफ़ाज़ सभी काग़ज़ परलफ़्ज़ ख़ुद बोल के तासीर बना लेते हैंमुहम्मद मुस्तहसिन जामी कभी मैं ढलता हूँ काग़ज़ पे नक़्श की सूरतमैं लफ़्ज़ बन के किसी की ज़बां में तैरता हूँख़ावर नक़वी हर ल...

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