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ग़ालिब की शायरी हिंदी में

रोटी पर शायरी

रोटी पर शायरी

रोटी पर शायरी उसे खिलौनों से बढ़कर है फ़िक्र रोटी कीहमारे दौर का बच्चा जन्म से बूढ़ा हैअबदुस्समद तपिश छान मारे हैं फ़लसफ़े सारेदाल रोटी ही सब पे भारी है जलता है कि ख़ुरशीद की इक रोटी हो तैयारले शाम से...