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खत शायरी

कागज पर शायरी

कागज पर शायरी

लिख के रख देता हूँ अलफ़ाज़ सभी काग़ज़ परलफ़्ज़ ख़ुद बोल के तासीर बना लेते हैंमुहम्मद मुस्तहसिन जामी कभी मैं ढलता हूँ काग़ज़ पे नक़्श की सूरतमैं लफ़्ज़ बन के किसी की ज़बां में तैरता हूँख़ावर नक़वी हर ल...