Home » कवि शायर

कवि शायर

Shishir Somvanshi

शिशिर सोमवंशी की कविता

शिशिर सोमवंशी की कविता बीच में अपने एक जंगल थाजिसको पार मुझे करना थाएक नदी भी थी क़िस्मत कीजिस पर पुल मुझको रचना थादिन छोटे थे रात बड़ी थीक्या बतलाऊँ कठिन घड़ी थीफिर भी मैं तुम तक पहुँचा थाजिस दिन हम ...

हास्य शायरी

हास्य शायरी

हास्य शायरी हमने कितने धोके में सब जीवन की बर्बादी कीगाल पे इक तिल देख के उनके सारे जिस्म से शादी कीसय्यद ज़मीर जाफ़री इस की बेटी ने उठा रखी है दुनिया सर परख़ैरीयत गुज़री कि अंगूर के बेटा ना हुआआगाह अ...

घमंड पर शायरी

घमंड पर शायरी

आसमां इतनी बुलंदी पे जो इतराता हैभूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता हैवसीम बरेलवी शोहरत की बुलंदी भी पल-भर का तमाशा हैजिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती हैबशीर बदर अदा आई जफ़ा आई ग़रूर आया हिजाब आयाहज़ार...