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कवि की तारीफ में शायरी

Shishir Somvanshi

शिशिर सोमवंशी की कविता

शिशिर सोमवंशी की कविता बीच में अपने एक जंगल थाजिसको पार मुझे करना थाएक नदी भी थी क़िस्मत कीजिस पर पुल मुझको रचना थादिन छोटे थे रात बड़ी थीक्या बतलाऊँ कठिन घड़ी थीफिर भी मैं तुम तक पहुँचा थाजिस दिन हम ...

स्कूल पर शायरी

स्कूल पर शायरी

भले लगते हैं स्कूलों की यूनीफार्म में बच्चेकंवल के फूल से जैसे भरा तालाब रहता हैमुनव्वर राना इस शहर में कितने चेहरे थे ,कुछ याद नहीं सब भूल गएइक शख़्स किताबों जैसा था ,वो शख़्स ज़बानी याद हुआ मकतब-ए-इ...