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उर्दू गजल

अखिलेश तिवारी की ग़ज़ल

ग़ज़ल

ग़ज़ल कवि: अखिलेश तिवारी, करके सब उसके हवाले इन दिनों फ़ुर्सत में हूंकौन अक़्लो-दिल संभाले इन दिनों फ़ुर्सत में हूँ वो मसाइल ज़ीस्त के हों या तसव्वुफ़ के बयानकितने ही पन्ने खंगाले इन दिनों फ़ुर्सत में हूँ घर ...

ग़ज़ल

अहमद सिदिक़ी की ग़ज़ल

ग़ज़ल ये क़लम है इसे ख़ून पिला कर लिक्खेंवरना जाऐं किसी और से जा कर लिक्खें हम सुख़न वाले सुख़न बेचते रहते हैं मगरआपका क्या है इसे झूट बता कर लिक्खें एक ही शख़्स है इस शह्र में भूका प्यासाऐसी ख़बरों स...

वरुन आनन्द की ग़ज़ल

वरुन आनन्द की ग़ज़ल

ग़ज़ल वरुन आनन्द वो जिसके पाँव में रक्खे हों काइनात के फूलक़ुबूल कैसे करेगा वो मेरे हाथ के फूल बनी भी उस की किसी से तो सिर्फ़ हम से हीउसे पसंद भी आए तो काग़ज़ात के फूल किसी का तोहफ़ा किसी और को दिया उसन...