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ईश्वर प्रेम पर शायरी

रहनुमा पर शायरी

रहबर / रहनुमा पर शायरी

निगह बुलंद सुख़न-ए-दिल नवाज़ जां पुरसोज़यही है रख़्त-ए-सफ़र मीर कारवाँ के लिएअल्लामा इक़बाल मुझे ए रहनुमा अब छोड़ तन्हामैं ख़ुद को आज़माना चाहता हूँहैरत गोंडवी दिल की राहें जुदा हैं दुनिया सेकोई भी रा...