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आर०जे सदफ दर्द भरी शायरी

शाम पर शायरी

शाम पर शायरी

तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बादकितने चुप-चाप से लगते हैं शजर शाम के बाद۔इतने चुप-चाप कि रस्ते भी रहेंगे ला इलमछोड़ जाऐंगे किसी रोज़ नगर शाम के बाद۔मैंने ऐसे ही गुनाह तेरी जुदाई में किएजैसे तूफ़ाँ ...

नफ़रत पर शायरी

नफ़रत (तास्सुब) पर शायरी

फ़साद, क़तल, तास्सुब, फ़रेब, मक्कारीसफ़ैद पोशों की बातें हैं क्या बताऊं मेंमुजाहिद फ़राज़۔ज़र्रे ज़र्रे में महक प्यार की डाली जायेबू तास्सुब की हर इक दिल से निकाली जायेदानिशध अलीगढ़ी۔तास्सुब की फ़िज़ा...

अनाथ और यतीम पर शायरी

अनाथ और यतीम पर शायरी

दीन-ओ-मज़हब बजा सही लेकिनरोने वाला यतीम किस का हैएहसान जाफ़री۔भूके प्यासे मुफ़लिस और यतीम हैं जोनज़रे इनायत उन पर भी कर दे मौलासलीम रज़ा रीवा۔बचा के लाएं किसी भी यतीम बच्चे कोऔर इस के हाथ से तख़लीक़-ए-क...

शिद्दत पर शायरी

शिद्दत पर शायरी

तुम्हारी याद की शिद्दत में बहने वाला अशकज़मीं में बो दिया जाये तो आँख उग आएहारिस बिलाल۔इक दूसरे से ख़ौफ़ की शिद्दत थी इस क़दरकल रात अपने आपसे मैं ख़ुद लिपट गयाफ़र्हत अब्बास ۔शिद्दते शौक़ में कुछ इतना उ...

ग़म पर शायरी

ग़म पर शायरी

दिल नाउम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो हैलंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो हैफ़ैज़ अहमद फ़ैज़ कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाबआज तुम याद बे-हिसाब आएफ़ैज़ अहमद फ़ैज़ अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएं कैसेतेरी मर...

flower

इज़्ज़त पर शायरी

शहर-ए-सुख़न में ऐसा कुछ कर इज़्ज़त बन जायेसब कुछ मिट्टी हो जाता है इज़्ज़त रहती हैअमजद इस्लाम अमजद आपकी कौन सी बढ़ी इज़्ज़तमैं अगर बज़म में ज़लील हुआमोमिन ख़ां मोमिन अपने लिए ही मुश्किल हैइज़्ज़त से ज...

मदद पर शायरी

मदद पर शायरी

किसी को कैसे बताएं ज़रूरतें अपनीमदद मिले ना मिले आबरू तो जाती हैनामालूम हम चराग़ों की मदद करते रहेऔर इधर सूरज बुझा डाला गयामनीष शुक्ला हमारे ऐब में जिससे मदद मिले हमकोहमें है आजकल ऐसे किसी हुनर की तला...

दुआ पर शायरी

दुआ पर शायरी

औरों की बुराई को ना देखूं वो नज़र देहाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर देख़लील तनवीर हया नहीं है ज़माने की आँख में बाक़ीख़ुदा करे कि जवानी तेरी रहे बेदाग़अल्लामा इक़बाल अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा क...

पत्थर पर शायरी

मुहब्बत पर शायरी

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोना जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जायेबशीर बदर और भी दुख हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवाराहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवाफ़ैज़ अहमद फ़ैज़ रंजिश ही सही दिल ह...