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आदमी पर शायरी

आदमी पर शायरी

आदमी पर शायरी

हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमीजिसको भी देखना हो कई बार देखनानिदा फ़ाज़ली वक़्त रहता नहीं कहीं टिक करआदत उस की भी आदमी सी हैगुलज़ार बस-कि दुशवार है हर काम का आसां होनाआदमी को भी मयस्सर नहीं इंसां होन...