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आंदोलन शायरी

इंक़िलाब शायरी

इंक़िलाब शायरी

कुछ उसूलों का नशा था कुछ मुक़द्दस ख़ाब थेहर ज़माने में शहादत के यही अस्बाब थेहसननईम हम परवरिश लौह-ओ-क़लम करते रहेंगेजो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगेफ़ैज़ अहमद फ़ैज़ हम अमन चाहते हैं मगर ज़ुलम के ...