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अल्लामा इक़बाल की शायरी हिंदी में

स्कूल पर शायरी

स्कूल पर शायरी

भले लगते हैं स्कूलों की यूनीफार्म में बच्चेकंवल के फूल से जैसे भरा तालाब रहता हैमुनव्वर राना इस शहर में कितने चेहरे थे ,कुछ याद नहीं सब भूल गएइक शख़्स किताबों जैसा था ,वो शख़्स ज़बानी याद हुआ मकतब-ए-इ...