Home » अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों शायरी

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों शायरी

अमन(शांति) पर शायरी

अमन (शांति) पर शायरी

अमन में हिस्सा छोड़ चुका हूँएक परिंदा छोड़ चुका हूँअक्स समस्ती पूरी۔अमन की कर ख़ैरात अता मेरे मौलाजंग-ओ-जदल को दूर हटा मेरे मौलासाहिल मुनीर۔कितना पुरअम्न है माहौल फ़सादाद के बादशाम के वक़्त निकलता नही...