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अज्ज आखाँ वारिस शाह नूँ

अमृता प्रीतम

अमृता प्रीतम

“हम एक ऐसे मआशरे में रहते हैं जहाँ मर्द एक ग़ुसुल करके पाक हो जाता है. जबकि औरत अपनी पाकीज़गी साबित करने के लिए पूरी ज़िंदगी लुटा देती है.”ये कथन उस महान लेखिका का है जिनका माथा चूमते हुए ...