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अच्छा वक्त शायरी

वक़्त पर शायरी

वक़्त पर शायरी

वक़्त अच्छा भी आएगा ‘नासिर’ग़म ना कर ज़िंदगी पड़ी है अभीनासिर काज़मी۔टूटी कमंद बख़्त का वो ज़ोर रह गयाजब बाम दोस्त हाथ से कुछ दूर रह गयानामालूम हादिसा भी होने में वक़्त कुछ तो लेता हैबख़्त ...