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अखिलेश तिवारी

अखिलेश तिवारी की ग़ज़ल

ग़ज़ल

ग़ज़ल कवि: अखिलेश तिवारी, करके सब उसके हवाले इन दिनों फ़ुर्सत में हूंकौन अक़्लो-दिल संभाले इन दिनों फ़ुर्सत में हूँ वो मसाइल ज़ीस्त के हों या तसव्वुफ़ के बयानकितने ही पन्ने खंगाले इन दिनों फ़ुर्सत में हूँ घर ...