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अकेलापन शायरी

रोटी पर शायरी

शब्द गुमनाम पर शाइरी

जब छेड़ती हैं उनको गुमनाम आरज़ूएँवो मुझको देखते हैं मेरी नज़र बचा केअली जव्वाद ज़ैदी वो एक शख़्स कि गुमनाम था ख़ुदाई मेंतुम्हारे नाम के सदक़े में नामवर ठहराहमीद कौसर जमी है गर्द आँखों में कई गुमनाम बरस...