चिकनी-चुपड़ी बात करती राज्य सरकार

तड़प- तड़प कर मर रहे शिक्षाकर्मी, चिकनी-चुपड़ी बात करती राज्य सरकार : फैक्टनेब

बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि संबद्ध डिग्री महाविद्यालय के लगभग 25 हजार शिक्षाकर्मी अपने परिजनों के साथ  राज्य सरकार की उपेक्षापूणॆ नीति के कारण तड़प तड़प मरने को मजबुर है तथा राज्य सरकार समस्याओं के समाधान के बजाय सिर्फ चिकनी चुपड़ी बात करने में विश्वास रखतीं है।                 

बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ ( फैक्टनेब )  के प्रधान संयोजक डा शंभुनाथ प्रसाद सिन्हा, राज्य संयोजक प्रो राजीव रंजन एवं मीडिया प्रभारी प्रो अरुण गौतम ने बताया कि संगठन द्वारा लगातार आन्दोलन एवं अन्य माध्यमों से आवाज उठाने के फलस्वरूप अगस्त – सितंबर 2020 में 88 संबद्ध डिग्री महाविद्यालयो को सत्र 2009-2012 एवं 2010-2013 का बकाया अनुदान भुगतान  करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई , पुनः जनवरी – फरवरी 2021 में 45 महाविद्यालयों को  तथा जुन- जुलाई से  41महाविद्यालयों का भुगतान किया जाना प्रक्रियाधीन है और 39 महाविद्यालयों के कागजात जांच की प्रक्रिया 23-24 अगस्त को किया जाना निर्धारित है । 

जांच प्रक्रिया से कोई परेशानी नहीं है                

फैक्टनेब के नेताओं ने बताया कि जांच प्रक्रिया से कोई परेशानी नहीं है , परेशानी  जांच की भेदभाव मंशा से है । क्या क्या जांच करना है और कब तक जांच पुरा कर लेना है ,यह सरकार और शिक्षा निदेशालय आज तक तय नहीं कर पायी है ।                 

एक ही तरह की पात्रता रखने वाले कुछ शिक्षण संस्थानों को भुगतान कर दिया जाना और कुछ को अभी जांच दायरे में  उलझाए रखा जाना समझ से परे एवं संदेह परक जान पड़ता है । शिक्षा मंत्री और शिक्षा निदेशालय से तहकीकात करने पर गोल-मटोल जवाब दिया जाता है । 

शिक्षक नेताओं की राज्य सरकार से अपील

शिक्षक नेताओं ने राज्य सरकार से अपील किया है कि जितनी तरह की जांच करानी है यह निर्धारित कर तय समय सीमा में जांच कर लगभग 9 वर्षों का बकाया वेतन मद् सहायक अनुदान राशि बढ़े हुए मंहगाई दर पर एकमुश्त भुगतान किया जाये , ताकि तड़प तड़प कर मर रहे शिक्षाकर्मी अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन यापन कर सकें ।                 

ज्ञातव्य है कि राज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे  शिक्षार्थी का लगभग 70 प्रतिशत का भार संबद्ध डिग्री महाविद्यालय के शिक्षाकर्मी ही वहन करते हैं । 

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