Vladimir Putin

फौलादी इरादों के हैं पुतिन | Vladimir Putin

Russia Ukraine War: यूक्रेन-रूस विवाद में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन(Vladimir Putin) के छवि एक फौलादी राष्ट्राध्यक्ष के रूप में उभरी है। सैन्य कार्यवाई करते हुए उन्होंने जिस तरह यूक्रेन को दुनिया से अलग-थलग कर दिया उससे उनकी इमेज एक सफल कूटनीतिज्ञ नेतृत्व की बनी है जो अमेरिका सहित यूरोपीय देशों का काट भी रखता है। आखिर क्या खास है रूसी राष्ट्रपति पुतिन के व्यक्तित्व में, यह समझना जरूरी है।

यूक्रेन संकट (Ukraine Crisis) के कारण रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin Biography) की एक ऐसी राष्ट्राध्यक्ष की छवि बनी है जो अपने मिशन को अपने ताकत से पूरा कर सके। हालांकि लोग पहले से ही उन्हें ऐसे राजनेता के तौर पर देखते आ रहे हैं जो किसी से न तो डरता है और न ही झुकता है।

मार्शल आर्ट के शौकीन है पुतिन

जैसा कि हर कोई जानता है कि 69 वर्षीय व्लादिमीर पुतिन (News About Vladimir Putin) अपने जवानी के मॉर्शल आर्ट के बड़े शौकीन रहे हैं। वो इस खेल जूडो में ब्लैक बेल्ट भी हैं। इस खेल की दो बारीकियां होती है। एक तो आक्रामण की शैली और दूसरी चतुराई जिनसे अपनी रक्षा की जा सके। पुतिन के राजनीति में इन दोनों बारीकियां बखूबी है। उन्होंने यूक्रेन को न सिर्फ सैन्य मोर्चे पर हराया है बल्कि उसे कूटनीतिक स्तर पर भी हराया है। पुतिन ने ऐसी चाल चली है कि आज यूक्रेन के साथ कोई खड़ा नहीं है। यही कारण है कि यूक्रेन मुद्दे पर अमेरिका समेत पूरे यूरोप के एक होने के बावजूद पुतिन पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने यूक्रेन को टुकड़ों में बांट दिया। इसके दो क्षेत्रों को स्वतंत्र देश का दर्जा भी दिया।

क्रीमिया युद्ध से ही कायम है पुतिन की दबंग राष्ट्राध्यक्ष की छवि

साल 2014 में रूस ने क्रीमिया पर हमला कर उसको अपने कब्जे में ले लिया था। उस वक्त भी रूसी सेना को दुनिया के कई देशों से चेतावनियां मिल रही थी लेकिन उन्होंने किसी की एक न सुनी। उलटे उन्होंने यूक्रेन के शेष हिस्सों में अलगाववादियों की खुलकर हर संभव मदद भी की।

7 अक्टूबर 1952 में जन्में पुतिन का पूरा नाम व्लादिमीर व्लादिमीरोविच पुतिन है। इनकी गिनती रूस के सबसे लोकप्रिय और फौलादी इरादों वाले राजनेताओं में की जाती है। 7 मई 2012 को पुतिन रूस के राष्ट्रपति बने थे। पुतिन को 2018 के चुनाव में 75 फीसदी से ज्यादा लोगों ने पसंद किया था। पश्चिमी देश तो इस लोकप्रियता के दावे को फर्जी मानता है। इससे पहले भी वे साल 2000 से 2008 तक रूस के राष्ट्रपति, 1999 से 2000 और 2008 से 2012 तक रूस के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं।

रूसी खुफिया एजेंसी में काम कर चुके हैं Vladimir Putin

व्लादिमीर पुतिन राजनीति में आने से पहले सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी केजीबी में शामिल थे। इसलिए उन्हें खुफिया तंत्र के सभी बारीकियों को समझने की क्षमता है। मात्र 23 साल की उम्र में ही वो केजीबी में शामिल हो गए थे जहां उन्हें जर्मनी के शहर ड्रेसडन में अनुवादक की नौकरी मिली।

खुफिया विभाग की नौकरी करने पर विवाद

कई लोगो का दावा है कि पुतिन खुफिया विभाग की नौकरी नहीं करते थे। लेकिन उनके नज़दीकियों का कहना है कि पुतिन महज मीडिया रिपोर्टिंग पर नजर रखने जैसा कम महत्वपूर्ण काम ही करते थे। केजीबी में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद तक पहुंचे थे। जब बर्लिन की दीवार गिरी थी उस समय तक खुफिया विभाग में ही थे। उसके बाद पुतिन वापस रूस लौटे और राजनीति शुरू की।

साल 1996 में पुतिन को राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के प्रशासन में बतौर डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया। इसके ठीक एक साल बाद उन्हें रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी का अध्यक्ष बना दिया गया। साल 1999 में उन्हें प्रधानमंत्री बनाय गया। हालांकि इनको प्रधानमंत्री बनाने का पार्टी के भीतर और बाहर भारी विरोध भी हुआ। जब येल्तसिन ने इस्तीफा दिया तो 31 दिसम्बर 1999 को पुतिन को रूस का कार्यवाहक राष्ट्रपति नामित कर दिया गया था। साल 2000 और 2004 में रूस के राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता।

Vladimir Putin के लिए रूस के संविधान में संशोधन किया गया

रूसी संविधान के अनुसार कोई भी राजनेता लगातार तीन बार रूस का राष्ट्रपति नहीं बन सकता था। सितंबर 2011 में पुतिन के कहने पर रूस के संविधान में संशोधन किया गया, जिसके कारण रूस के राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल से बढ़ाकर छह साल कर दिया गया। मार्च 2012 में व्लादिमीर दोबारा चुनाव जीतकर रूस के राष्ट्रपति पद पर फिर आसीन हुए। 2018 में रूस में हुए राष्ट्रपति चुनाव में तो पुतिन को 75 फीसदी से ज्यादा मत मिले थे।

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Cartoonist Irfan

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