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आख़िर बिहार की नीतीश सरकार को हो क्या गया है?

sharab bandi /nitish kumar
sharab bandi /nitish kumar

कल से एक ख़बर बड़ी चौंकाने वाली चल रही है. मालूम नहीं, औरों को इस ख़बर ने चौंकाया या नहीं. लेकिन मैं तो इस ख़बर से बेहद अचंभित हूँ और सदमे में भी हूँ कि आख़िर बिहार की नीतीश सरकार को हो क्या गया है? क्या सरकार के पास सोचने- समझने की शक्ति जाती रही है?

जी हाँ, मैं नीतीश सरकार के उस अजब- ग़ज़ब फ़रमान का ज़िक्र कर रहा हूँ जिसमें शिक्षकों को शराबियों और शराब तस्करों की मुखबिरी करने का आदेश दिया गया है. यानी अब शिक्षकों को शराबियों की पड़ताल करनी है. बिहार में शिक्षा व स्वास्थ्य तो यूँ ही आख़िरी साॅंस ले रहा है और नीति आयोग ने तो पहले ही बिहार को फिसड्डी घोषित कर चुका है. लेकिन नीतीश सरकार को शिक्षा और शिक्षा के गुणवत्ते से कोई लेना- देना नहीं है. क्या शिक्षकों का यही काम रह गया है कि वह शराबियों और शराब माफियाओं की मुखबिरी करे? हद्द है मानसिक दिवालियेपन की. अगर उन्हें मुखबिरी ही करनी है तो स्कूलों को बॅंद करवा कर और शिक्षा को तिलांजलि देकर मुखबिरी विभाग खोलिए और उनलोगों को वहीं नौकरी- चाकरी दीजिये. अब माननीय नीतीश कुमार जी ये मत कहिएगा कि ये तो शिक्षा विभाग का निर्णय है, मुझे क्या करना? ये इसलिए कह रहा हूँ कि जब पटना में गंदगी का सवाल उठा था तो आपने कहा था कि यह निगम की ज़िम्मेदारी है.

ख़ैर, मैं यह जानना चाहता हूँ माननीय कि क्या आपका पुलिस प्रशासन इतना निकम्मा है कि आप शिक्षकों को इस काम में झोंक रहे हैं? आपने तो पुलिस को शपथ दिलाई थी. फिर क्या हुआ उस शपथ का माननीय? आज अदालत को भी पूछना पड़ रहा है कि क्या माफियाओं के साथ पुलिस की मिलीभगत के बग़ैर शराब मिल रही है? क्या पुलिस को मालूम नहीं कि शराब हर जगह बिक रही है? एक पैरेलल इकाॅनाॅमी रन कर रहा है और पुलिस और माफियाओं का.

लगातार ज़हरीली शराब से बिहार में मौतें हो रही हैं. कौन है इसके लिए ज़िम्मेदार? सरकार बताएगी. गोवा में, महाराष्ट्र में, आंध्र प्रदेश और अन्य जगहों पर शराब की ख़ूब बिक्री होती है. मगर वहाँ ज़हरीली शराब से मौतें नहीं होतीं. क्यों? वहाँ अपराध भी बेलगाम नहीं है. यहाँ आए दिन ज़ेवरात की दुकानों में लूट और हत्याएं हो रही हैं. लेकिन नीतीश सरकार अपनी पीठ थपथपाती है कि अपराध में शराब बंदी के बाद कमी आई है. अगर अपराध में यही कमी है तो सरकार को मुबारक हो.. आज पुलिस के छोटे से लेकर आला अधिकारियों तक को शराब बंदी में झोंक दिया गया है और शराब है कि बंद होने का नाम नहीं ले रही. होगी भी नहीं बंद क्योंकि शराब बंदी पूरी दुनिया में फेल हुई है, जैसे बिहार में फेल हो चुकी है.

नीतीश सरकार समाज सुधार की बात कर रही है. बहुत अच्छी बात है हुज़ूर. फिर देर क्यों. पूरे मुल्क में शराब बंद करवा दीजिये. अभी तो आपके एन डी ए की ही सरकार है केन्द्र में. बिल्कुल मोदी जी से बात कीजिये और कहिए कि वे भी इस समाज सुधार का हिस्सा बने. लेकिन हुज़ूर, शिक्षकों को तो मत झोंकिए इसमें. शिक्षा के गुणवत्ता पर ध्यान दीजिये जैसे नवीन पटनायक कर रहे हैं. जब भी समाचार देखिए, शराब… शराब… शराब… आख़िर हो क्या गया है बिहार को. रोज़गार है नहीं. छात्र सड़कों पर हैं. मगर उस पर बयान आपका नहीं आएगा.

जाने माने शायर सुदर्शन फ़ाकरी का एक शे’र है

” हम तो समझे थे कि अबके बरसात में बरसेगी शराब

बरसात आई तो बरसात ने दिल तोड़ दिया.”

लेकिन बिहार में आलम यह है कि हर जगह शराब बरस रही है. और इसलिए पीने वालों के दिल नहीं टूट रहे. शराब भले ही मयख़ाने में नहीं मिल रही. मगर हर जगह मिल रही.

और हाँ, शिक्षकों को मुखबिरी में लगाने का सीधा मतलब है उन्हें माफियाओं के साथ दुश्मनी मोल लेना और इसके परिणाम बहुत ही ख़राब होंगे. क्या शिक्षकों के जान की कोई क़ीमत नहीं है? जब माफियाओं और अपराधियों का मन बढ़ा हुआ है, तो वे शिक्षकों को छोड़ेंगे क्या? क्या यही है सुशासन का पैमाना? जी हाँ, याद आ रहा है नीतीश कुमार का नारा

” बिहार में बहार है नीतीश कुमार है “…

लेखक: नीलांशु रंजन

Pawan Toon Cartoon

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