Home » Blog » यूपी के बेरोज़गार कमा रहे हैं पचास हज़ार | Ravish Kumar Prime Time

यूपी के बेरोज़गार कमा रहे हैं पचास हज़ार | Ravish Kumar Prime Time

Ravish Kumar Prime Time
Ravish Kumar Prime Time

यूपी के बेरोज़गार कमा रहे हैं पचास हज़ार |! बीजेपी अध्यक्ष नड्डा का अर्थशास्त्र

जो पी नड्डा का कहना है कि यूपी के बेरोज़गार पचास हज़ार रुपया कमा रहे हैं। यूपी में रोज़गार का आँकड़ा इसलिए कम है क्योंकि पचास हज़ार कमाने वाला सरकारी नौकरी चाहता है और रोज़गार कार्यालय में पंजीकरण करा लेता है। इसका मतलब यूपी के बेरोज़गार छह लाख सालाना कमा रहे हैं? तब तो आयकर भी देते होंगे?

जे पी नड्डा का यह तर्क धर्म और जाति की राजनीति से भ्रष्ट हो चुके यूपी के नौजवानों के बीच खूब चलेगा। यूपी के लोग मान भी लेंगे। बीजेपी अध्यक्ष का यह बयान साबित करता है कि यूपी की नौजवानी ने सोचना बंद कर दिया है। उनके लिए बीजेपी का बयान ही श्लोक है। हाल में देश भर के मज़दूरों के लिए ई श्रम कार्ड बना लेकिन केवल यूपी के कार्ड धारकों के खाते में पाँच सौ या हज़ार दिया गया। एम ए पास करने वाले नौजवानों ने भी पाँच सौ के लिए श्रम कार्ड बनवा लिया था। क्या वे इतने अनैतिक हैं कि पचास हज़ार कमा रहे हैं और पाँच सौ के लिए श्रम कार्ड बनवा रहे हैं?

इंडियन एक्सप्रेस में जो की नड्डा का इंटरव्यू छपा है। इस इंटरव्यू के लिए एक्सप्रेस ने तो हेडलाइन लगाई है उसे फ़्रेम कर हर बेरोज़गार को रोज़गार प्रमाण पत्र के रूप में देना चाहिए। हमें नहीं पता था कि यूपी के बेरोज़गार बेरोज़गार नहीं है। वह पचास हज़ार की नौकरी कर रहा है। धर्म के नाम पर राष्ट्रवाद की राजनीति ने हिन्दी प्रदेश के नौजवानों का दिमाग़ खोखला कर दिया है। तभी आप कुछ भी बोल सकते हैं।

मुझे नहीं पता था कि यूपी में बेरोज़गारी नहीं है। सब पचास हज़ार कमा रहे हैं। यूपी के बेरोज़गार इतनी बड़ी नौटंकी कर सकते हैं? ग़ज़ब। नौकरी होते हुए भी बेरोज़गार बन कर पुलिस की लाठी खा रहे हैं? भाई ये तो और ग़ज़ब हो गया। तभी मैं कहता हूँ हिन्दी प्रदेश के नौजवानों से दूर रहो। ये

या तो धर्म से सोचेगा या जाति से। भला हो कि नड्डा जी का इंटरव्यू पढ़ लिया और मेरी आँखें खुल गईं। पचास हज़ार कमा रहे हैं फिर भी बेरोज़गार बन रहे हैं? यूपी में बेरोज़गारों की फ़ैन्सी ड्रेस प्रतियोगिता चल रही है क्या?

यह इंटरव्यू अंग्रेज़ी में छपा है। हमने सवाल और जवाब दोनों यहाँ उतार दिया है।

A- Despite the development under BJp rule over the last five years, why is the employment rate in UP lower than the national average ?

“I have been questioning these statistics. The youth have aspirations, most migrated to different states, have got jobs. So When you see the UP data, it does not look mean that people in the state are unemployed. When the economy grows, jobs will be created (PLUS) Even if one is earning Rs 50,000, one considers oneself unemployed as a people want a government job. They get registered at the employment exchange. So the number goes up but the person is earning.”

Written By Ravish Kumar

Cartoonist Irfan

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>