चाँद पर शाइरी

प्यार की शाइरी

दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तरी याद थी अब याद आया
नासिर काज़मी

करूँगा क्या जो मुहब्बत में हो गया नाकाम
मुझे तो और कोई काम भी नहीं आता
ग़ुलाम मुहम्मद क़ासिर

तेरे इशक़ की इंतिहा चाहता हूँ
मरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
अल्लामा इक़बाल

तुमको आता है प्यार पर ग़ुस्सा
मुझको ग़ुस्से पे प्यार आता है
अमीर मीनाई

इशक़ पर-ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब
कि लगाए ना लगे और बुझाए ना बने
मिर्ज़ा ग़ालिब

प्यार की शाइरी

मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखा
उसको छुट्टी ना मिले जिसको सबक़ याद रहे
मीर ताहिर अली रिज़वी

इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है
सिमटे तो दिल-ए-आशिक़ फैले तो ज़माना है
जिगर आबाद य

तुम मुहब्बत को खेल कहते हो
हमने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
बशीर बदर

हमसे क्या हो सका मुहब्बत में
ख़ैर तुमने तो बेवफ़ाई की
फ़िराक़-गोरखपुरी

अंजाम वफ़ा ये है जिसने भी मुहब्बत की
मरने की दुआ मांगी जीने की सज़ा पाई
नुशूर वाहिदी

प्यार की शाइरी

तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही
तुझसे मिलकर उदास रहता हूँ
साहिर लुधियानवी

सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं
और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं
जून ईलिया

हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाऐंगे
अभी कुछ बेक़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ
क़तील शिफ़ाई

क्या कहा इशक़ जावेदानी है
आख़िरी बार मिल रही हो किया
जून ईलिया

तुम मुझे छोड़ के जाओगे तो मर जाऊँगा
यूं करो जाने से पहले मुझे पागल कर दो
बशीर बदर

प्यार की शाइरी

ख़ुदा की इतनी बड़ी कायनात में मैंने
बस एक शख़्स को मांगा मुझे वही ना मिला
बशीर बदर

मुझे अब तुमसे डर लगने लगा है
तुम्हें मुझसे मुहब्बत हो गई किया
जून ईलिया

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया
साहिर लुधियानवी

तुमसे बिछड़ कर ज़िंदा हैं
जान बहुत शर्मिंदा हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़

ना पूछो हुस्न की तारीफ़ हमसे
मुहब्बत जिससे हो बस वो हसीं है
आदिल फ़ारूक़ी

प्यार की शाइरी

आज देखा है तुझको देर के बाद
आज का दिन गुज़र ना जाये कहीं
नासिर काज़मी

मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा
सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए
कृष्ण बिहारी नूर

गुम और ख़ुशी में फ़र्क़ ना महसूस हो जहां
मैं दिल को इस मुक़ाम पे लाता चला गया
साहिर लुधियानवी

इस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ
अब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ
अहमद फ़राज़

किसी के तुम हो किसी का ख़ुदा है दुनिया में
मरे नसीब में तुम भी नहीं ख़ुदा भी नहीं
अख़तर सईद ख़ान

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