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फूल पर शायरी

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यहीं कहीं पे मेरे फूल दफ़न हैं प्यारे
यहीं कहीं पे हैं नौहे मेरी बहार के भी
राना ग़ुलाम मोहिउद्दीन
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ये जो सहरा में खिला फूल, बना है कांटा
किसी तालाब के पानी का कंवल हो जाये
अरशद सईद
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भरी बहार में अब बैठ कर ये सोचता हूँ
क्यों मेरे दर पे कोई फूल फिर खिला ही नहीं
सकलेन जाफ़री
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तितलियाँ , फूल , बाग़ मुर्शिद हैं
आँख वालो चिराग़ मुर्शिद हैं
कोमल जोईआ

लोग कांटों से बच के चलते हैं
मैंने फूलों से ज़ख़म खाए हैं
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हमने कांटों को भी नरमी से छुआ है अक्सर
लोग बेदर्द हैं फूलों को मसल देते हैं
बिस्मिल सईदी
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मैं चाहता था कि उसको गुलाब पेश करूँ
वो ख़ुद गुलाब था उसको गुलाब क्या देता
अफ़ज़ल इलाहाबादी
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फूल पर शायरी


कांटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर
फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ
शकील बदायूंनी
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कांटों से दिल लगाओ जो ताउम्र साथ दें
फूलों का क्या जो सांस की गर्मी ना सह सकें
अख़तर शीरानी
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शबनम के आँसू फूल पर ,ये तो वही क़िस्सा हुआ
आँखें मेरी भीगी हुई चेहरा तेरा उतरा हुआ
बशीर बदर
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आज भी शायद कोई फूलों का तोहफ़ा भेज दे
तितलियाँ मंडला रही हैं कांच के गुल-दान पर
शकेब जलाली
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अगरचे फूल ये अपने लिए ख़रीदे हैं
कोई जो पूछे तो कह दूँगा उसने भेजे हैं
इफ़्तिख़ार नसीम

दिल की शाख़ों से शोख़ फूलों को
एक चंचल शरीर खींच गया
आतिफ़ जावेद आतिफ़
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सूखे सूखे स्याह फूलों से
आ रही है किताब की ख़ुशबू
आसिफ़ अंजुम
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फूल पर शायरी


फूलों से है वहशत ना किसी रंग से वहशत
वहशत है तो बस दिल पे लगी ज़ंग से वहशत
सय्यद अनवार ज़ैन
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चाँद, कलीयों, कभी फूलों की ज़यारत की है
मैंने इक उम्र-ए-मोहब्बत की रियाज़त की है
सग़ीर अहमद

ये जो आँखें मैं किसी फूल पे रख देता हूँ
मुझे कुछ और सुझाई नहीं देता साईं
रफ़ी रज़ा
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आग में फूल खुले हैं ,ये सुना था लेकिन
आज, शादाब गुलाबों ने जलाया हमको
इज़हार अल्लाह इज़हार
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मैं ने उस जान-ए-बहाराँ को बहुत याद किया
जब कोई फूल मेरी शाख़-ए-हुनर पर निकला
अहमद फ़राज़
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ख़ुशबू ही जब फूलों से इंकारी हो
आस लगाए गुल-दानों का क्या होगा
समर्याब समर
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हर कोई रात की रानी का पुजारी ठहरा
ख़ुशक फूलों को ख़रीदार कहाँ मिलते हैं
इमरान ऐवान

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