व्यक्तित्व पर शायरी

व्यक्तित्व पर शायरी

तेरा वजूद तेरी शख़्सियत कहानी क्या
किसी के काम ना आए तो ज़िंदगानी क्या
दिनेश कुमार
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शख़्सियत उसने चमकदार बना रखी है
ज़हनीयत क्या कहें बीमार बना रखी है
गोविंद गुलशन
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तमाम शख़्सियत उस की हसीं नज़र आई
जब उस के क़तल की अख़बार में ख़बर आई
अज़हर अनाएती

हमारी शख़्सियत क्या शख़्सियत है
हर इक तेवर दिखावे की परत है
कंवल ज़ियाई
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कितना नीचे गिरा लिया ख़ुद को
आपने शख़्सियत परस्ती में
राज़िक़ अंसारी

शख़्सियत को ज़लील करता है
झूटे फ़न के ग़ुबार का साया
सरफ़राज़ ख़ान वक़ार
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दर्द-ए-दिल मोतबर भी होता है
शख़्सियत का असर भी होता है
शरीफ़ मुनव्वर

व्यक्तित्व पर शायरी


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शख़्सियत अपनी बिखर सकती नहीं
दोस्ती का और वफ़ा का साथ है
उज़्मा इक़बाल
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घुटन होती है दोहरी शख़्सियत से
दिल आईने की सूरत चाहता हूँ
मुनीर सैफी
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मुख़ालिफ़त से मेरी शख़्सियत सँवरती है
मैं दुश्मनों का बड़ा एहतिराम करता हूँ
बशीर बदर

रोशनी में अपनी शख़्सियत पे जब भी सोचना
अपने क़द को अपने साये से भी कमतर देखना
हिमायत अली शायर
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है अज़ीज़ अपना उसे शख़्सी मुफ़ाद
मस्लहत बीं आज का फ़नकार है
बर्क़ी आज़मी
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बैठ कर तेरी गली में बैठने वालों के पास
ख़ाक कर लें अपनी शख़्सी अज़्मतें तेरे लिए
बिस्मिल सईदी
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उसकी तो शख़्सियत भी नहीं मुझपे खुल सकी
जिस शख़्स को मैं लिख के कई शेअर देता था
सूफ़ी नदीम भाभा
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भाभा तुझको क्या मालूम है शख़्सियत उस लड़की की
जिसकी ख़ातिर तू ने पी कर शेअर कहे बर्बाद हुआ
नदीम भाभा

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