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चीन के बढ़ते दबाव के बीच भारत के साथ सीमा पर संघर्ष

पाकिस्तान पर चीन के बढ़ते दबाव के बीच भारत के साथ सीमा पर संघर्ष विराम की घोषणा

संयुक्त राष्ट्र के महासभा के प्रेसिडेंट वोल्कन बोज़किर ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि शांति बनाए रखने की उद्देश्य से उठाया गया यह कदम अन्य देशों के लिए भी उदाहरण योग्य है। इधर अमेरिका ने भी इस कदम का स्वागत किया है। अमेरीका ने इसे दक्षिण एशिया में शांति और स्थायित्व के लिए एक सकारात्मक कदम बताया है।

भारत तथा पाकिस्तान ने 24-25 फरवरी की मध्यरात्रि से नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर संघर्ष विराम की घोषणा की है। यह घोषणा दोनों देशों की सेनाओं के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ मिलिटरी ऑपरेशंस (डीजीएमओ) के बीच हुई बातचीत के बाद की गई है। संयुक्त बयान ने कहा गया है कि दोनों देश संघर्षविराम के लिए तय पिछले समझौतों का पालन करते हुुुए नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी बंद करेंगे। 

इस समझौते के लिए भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिटरी ऑपरेशंस ने हॉटलाइन के ज़रिए एक दूसरे से चर्चा की। दोनों देश सीमा पर सौहार्दपूर्ण माहौल कायम करने के लिए सहमत है।  एक संयुक्त बयान जारी कर बताया गया है कि आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए दोनों डीजीएमओ एक दूसरे से जुड़े उन गंभीर मुद्दों पर बातचीत करेंगे, जिससे इलाक़े में शांति भंग होने या हिंसा बढ़ने का ख़तरा हो।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष विराम के पहल की हो रही प्रशंसा


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष विराम के पहल की प्रशंसा हो रही है। दोनों देशों के इस पहल से दक्षिण एशिया में शांति कायम होने की उम्मीद बढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र ने इस पहल का स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र के महासभा के प्रेसिडेंट वोल्कन बोज़किर ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि शांति बनाए रखने की उद्देश्य से उठाया गया यह कदम अन्य देशों के लिए भी उदाहरण योग्य है। इधर अमेरिका ने भी इस कदम का स्वागत किया है। अमेरीका ने इसे दक्षिण एशिया में शांति और स्थायित्व के लिए एक सकारात्मक कदम बताया है। 


दरअसल, पाकिस्तान के हर घरेलू मामलों में चीन के बढ़ते हस्तक्षेप से भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव बढ़ते ही जा रहा है। चीन के दबाव में पाकिस्तान सीमा पर अपनी सैन्य गतिविधियों को बढ़ा ही रहा है। यह दक्षिण एशिया की शांति-व्यवस्था के लिए अच्छी खबर नहीं है। पाकिस्तान पर चीन के बढ़ते दवाब के बीच  भारत के साथ वार्ता करने के लिए तैयार होना और संघर्ष विराम के लिए सहमत होना एक अच्छा संकेत है और भारत की कूटनीतिक जीत भी मानी जा रही है। इधर अब चीन और भारत में भी सीमा को लेकर टकराव होती रहती है। ऐसे में चीन और पाकिस्तान दोनों से एक साथ सीमा पर टकराव भारत के लिए शुभ संकेत नहीं था। अब भारत के कूटनीतिक पहल से पाकिस्तान संघर्ष विराम के लिए राजी हो गया है जो एक अच्छी खबर है।  

(thinkerbabu.com)

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