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औरतों को समझने के दोहरे मापदंड

समाज में औरतों को समझने के दो ही मापदंड है। पहली ‘नेक औरत’ तो दूसरी ‘बदचलन औरत’। इसके अतिरिक्त लोगों के पास औरतों को समझने का कोई और सर्वमान्य तरीका है ही नहीं। वास्तव में, नेक औरत और बदचलन औरत की अवधारणा औरतों की यौनिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने की सामाजिक पहल का परिणाम है। समाज औरतों से अपने तरीके से यौनिक पवित्रता का प्रमाण मांगती है।

पुणे में रहने वाली डॉ अनिता पेशवानी का जीवन आत्मनिर्भर बनने तथा आत्मनिर्भर बने रहने के लिए संघर्ष करने वाली व्यक्तित्व की कहानी है। वो स्पष्ट तौर पट स्वीकार करती हैं कि आज भी महिलाओं की स्वतंत्रता तथा स्वविवेकपूर्ण निर्णय लेने की उनकी आदत को हमेशा संशय की नज़र से देखा जाता है। हर किसी को ‘नेक औरत’ चाहिए यानि समस्त सामाजिक परम्पराओं के बोझ को ढोने वाली वो औरत जो कभी स्वतंत्र बनना न चाहे, जो कभी अपने अधिकारों की बात न करे। इससे इतर सारी औरते ‘बदचलन औरत’ की श्रेणी में आती है। 

पुणे की डॉ अनिता पेशवानी बताती है कि महिलाओं को अपने खुद के देह पर अधिकार नहीं है। वो अपनी मर्जी से पुरुषों की तरह किसी से मिल जुल नहीं सकती है। इन सभी का मकसद महिलाओं के देह पर सामाजिक निगरानी करना है। यह बात इतनी गहरी है कि इसी लिए महिलाओं को घर से बाहर जाकर काम करने, देर रात तक घर वापस आने, अपने अधिकारों की बात करने आदि से रोका जाता है। महिलाएं चाहे कितनी भी पढ़ लिख जाए लेकिन उन्हें हमेशा पुरुषवादी मानसिकता की निगरानी में ही रहना है। तब जाकर वो अपनी यौनिक पवित्रता का प्रमाण दे सकती हैं।

पुरुष भी गलत होते हैं, अपनी मनमर्जी से रिश्ते बनाते हैं लेकिन उनसे कोई प्रमाण नहीं मांगता। इसलिए पुरुषों में महिलाओं की भांति ‘अच्छे पुरूष’ या ‘बुरे पुरुष’ नहीं होते। पुरुषों की नज़रों में सारे पुरुष अच्छे होते हैं। हाँ, महिलाओं के बीच एक कहावत प्रचलित है कि सारे पुरुष एक जैसे ही होते हैं। 

चन्द्रयान और मंगलयान वाले भारत में इस तरह की मानसिकता यह दर्शाती है कि जिस सामाजिक समस्याओं के साथ भारत आजाद हुआ वो कमोबेश आज भी मौजूद है। विज्ञान चाहे जितनी तरक्की कर ले, बाज़ार चाहे जितना अमीर बन जाए, महिलाओं के प्रति सोच में कोई बदलाव नहीं हुआ है।(thinkerbabu)

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5 Comments
  1. Very much true n it’s real story of a women

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  2. Very well written!! An eye opener.

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  3. Very inspiring article and life of Anita.

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  4. Its true .well don ma”am

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  5. समाज के लिए बहुत अच्छी लाइन्स है को औरत को घर मे कैद न रख कर उसको भी सम्मान देना चाहिए
    वो भी इंसान है

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