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तेज रफ़्तार से बढ़ रहा है ओमिक्रोन |Omicron

ओमिक्रोन/Omicron
ओमिक्रोन/Omicron

पूरी दुनिया एक बार फिर कोविड(covid) संक्रमण की चपेट में जाने वाली है। कोरोना का नया वैरियंट बड़ी तेज रफ़्तार से बढ़ रहा है। अब तक दुनिया के 108 देशों में 1,51,000 से ज्यादा ऑमिक्रोन के मामले दर्ज़ किए गए हैं। ओमिक्रोन बड़ी तेज रफ़्तार से यूरोप,अफ्रीका और नॉर्थ अमेरिका में बढ़ रही है। इस मामले में देश की स्थिति भी चिंता जनक है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण के अनुसार यहां के 17 राज्यों में ओमिक्रोन का 358 मामला आया है। उन्होंने यह भी बताया है कि ओमिक्रोन के सक्रिय मामलों में  114 मरीज संक्रमण से ठीक हो चुके हैं तथा 244 मरीजों का इलाज इस समय चल रहा है।

ओमिक्रोन (Omicron) के लक्षण क्या है?

यूरोप में विश्व स्वास्थ्य संगठन के शीर्ष अधिकारी हैंस क्लूज ने कहा है कि यूरोप में पुष्टि किए गए ओमिक्रॉन संक्रमण वाले 89 प्रतिशत लोगों में खांसी, गले में खराश, बुखार सहित अन्य कोरोनावायरस वेरिएंट के साथ सामान्य लक्षण दिखाई दिए हैं ।

ओमिक्रोन (Omicron)कैसे फैलता है?

ओमिक्रोन के बारे में पूरी दुनिया मैं चिंता बढ़ रही है। दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने शुक्रवार को कहा कि नवीनतम कोरोनवायरस वायरस डेल्टा के रूप में दोगुने से अधिक तेजी से फैलता है, जिसे वायरस का सबसे संक्रामक संस्करण माना जाता था।

डेल्टा वैरियंट (delta variant)की सक्रियता भी बढ़ रही है

ओमिक्रॉन अपनी तेज रफ्तार से दुनिया भर को चिंतित किए हुए है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। देश के वैज्ञानिकों ने इसके पैटर्न को समझने के लिए 183 मरीजों पर रिसर्च किया गया।  यूनियन हेल्थ सेक्रेटरी राजेश भूषण के अनुसार रिसर्च में शामिल 183 मामलों में से केवल 96 लोगों के वैक्सीनेशन स्टेटस के बारे में ही पता चल सका है। 96 में से 87 मरीजों को वैक्सीन (Vaccine) की दोनों डोज लग चुकी हैं।

गौरतलब बात यह है कि ओमिक्रोन से संक्रमित मरीजों में से करीब 50 प्रतिशत मरीज वैक्सीनेटेड हैं। वहीं  3 ऐसे मामले हैं जिन्हें बूस्टर डोज भी लग चुकी है। दो लोगों को वैक्सीन की सिर्फ एक डोज लगी है । मात्र 7 मरीजों को ही  वैक्सीन नहीं लगी है।  बाकी बचे मरीजों में से 73 के वैक्सीनेशन के स्टेटस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। इनमें से 16 मरीज 18 साल से कम उम्र के हैं इसलिए उन्हें वैक्सीन नहीं लगी है।

ओमिक्रोन के लक्षण कितने समय तक रहते हैं?

ओमिक्रोन के हल्के मामले वाले लोग आमतौर पर एक से दो सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। गंभीर मामलों में, ठीक होने में छह सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है, और हृदय, गुर्दे, फेफड़े और मस्तिष्क को स्थायी नुकसान हो सकता है

 15 से 18 साल के बच्चों के वैक्सिनेशन तथा बूस्टर (booster)डोज पर आ चुका है सरकारी फैसला

देश में नए साल में बच्चों के लिए भी वैक्सिनेशन अभियान शुरू होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने राष्ट्र के नाम सम्बोधन में 3 जनवरी से 15 से 18 साल के बच्चों के लिए कोविड वैक्सीनेशन अभियान शुरू करने की बात कही है। ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य एवं फ्रंटलाइन कर्मचारियों को कोविड वैक्सीन का बूस्टर डोज लगाने का फैसला लिया है जिसकी शुरुआत नए साल में 10 जनवरी किया जाएगा। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी बताया कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के वैसे लोग जो किसी गम्भीर बीमारियों से पीड़ित हैं वैसे लोगों को भी 10 जनवरी से बूस्टर डोज दिया जाएगा। इसके लिए यह आवश्यक है कि जो बूस्टर डोज लेना चाहते है उन्हें किसी डॉक्टर से सलाह लेना पड़ेगा।

कोविड -19 वैक्सीन के दुष्प्रभाव होते हैं?

सभी दवाओं की तरह, COVID-19 के टीके भी दुष्प्रभाव पैदा कर सकते हैं, लेकिन हर किसी को यह नहीं होता है। अधिकांश दुष्प्रभाव हल्के होते हैं और एक सप्ताह से अधिक समय तक नहीं रहते। जैसे, इंजेक्शन से हाथ में दर्द।हल्का बुखार इत्यादि।

डेल्टा वेरिएंट की सक्रियता अभी भी सबसे अधिक

सबसे बड़ी बात यह है कि अभी भी देश में डेल्टा वेरिएंट के मामले सबसे अधिक हैं। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार डॉ. भार्गव का कहना है कि डेल्टा वेरिएंट देश में अभी भी डॉमिनेंट है। हमें सावधानी बरतने की जरूरत है साथ ही वैक्सीन भी लगवानी जरूरी है। भले ही डेल्टा वेरिएंट के संक्रमण की दर ओमिक्रोन की दर से कम है लेकिन मरीज पर इसका प्रभाव बहुत अधिक होता है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि देश में दूसरी लहर के लिए यह वेरियंट ही जिम्मेदार रही है।

क्या आपको बिना बुखार के ओमिक्रोन वायरस रोग हो सकता है?

हां, आप ओमिक्रोन से संक्रमित हो सकते हैं और आपको खांसी या बुखार के बिना अन्य लक्षण हो सकते हैं। ये हलके मामले में होता है। विशेष रूप से पहले कुछ दिनों में। ध्यान रखें कि कम से कम या बिल्कुल भी लक्षण न होने पर भी ओमिक्रोन होना संभव है।

कोरोना महामारी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने दिए राज्य सरकारों को निर्देश

कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर केंद्र सरकार ने 10 राज्यों में मल्टी डिसिप्लीनरी टीमों को तैनात करने का फैसला किया है। इस फैसले के तहत बिहार(Bihar) में भी इस टीम को तैनात किया जाएगा। केंद्र से आई टीम ने बिहार में मेडिकल तैयारियों की समीक्षा कर रही है। यह टीम  बिहार में फॉरेन ट्रैवल हिस्ट्री वालों का ट्रेसिंग और टेस्टिंग सिस्टम की जानकारी ले रही है और उसकी समीक्षा भी करेगी। यहां पॉजिटिव लोगों के कॉन्टेक्ट में आने वाले लोगों की ट्रेसिंग तथा इस संबंध में लिए जा रहे सभी ऐक्शन की समीक्षा कर रही है।  केंद्रीय टीम बिहार में जिनोम सीक्वेंसिंग तथा कंटेनमेंट जोन और इसकी मॉनिटरिंग करेगी।

ओमिक्रोन के लक्षण को पहचाना जरूरी है

  • ओमिक्रोन के लक्षणों को पहचाना बहुत जरूरी है क्योंकि इसके लक्षण डेल्टा वेरियंट से बिलकुल अलग है।
  •  थकान- ओमिक्रॉन से संक्रमित लोग बहुत अधिक थकान महसूस कर सकते हैं।  कुछ ही दूर पैदल चलने या काम करने में बहुत अधिक थकान महसूस होती है।
  • गले में अजीब तरीके का चुभन महसूस करना – ओमिक्रॉन से संक्रमित व्यक्ति के गले में हमेशा चुभन महसूस होता है। गले की चुभन में जलन या कुछ गड़ने जैसा महसूस होता है।
  • हल्का बुखार- इस वैरिएंट से पीड़ित मरीज को हल्का  बुखार रहता है। इसलिए आप हल्के बुखार को नजरअंदाज न करें।
  • रात को पसीना आना और शरीर में दर्द-  ओमिक्रॉन से संक्रमित व्यक्ति को रात के समय पसीना आता है। पसीना इतना अधिक हो सकता है कि आपके कपड़े या बिस्तर तक गीले हो सकते हैं। 
  • सूखी खांसी- इसमें संक्रमित व्यक्ति को सूखी खांसी हो सकती है। 
  • स्वाद की क्षमता तथा सुगंध का कम जाना या खत्म होना नहीं है ओमिक्रोन का लक्षण
  • ओमिक्रोन के मामलों में अभी तक स्वाद की क्षमता तथा सुगंध के कम होने या खत्म होने का मामला नहीं आया है। ठीक इसी तरह इसमें सर्दी से न् तो नाक बंद होती है न ही नाक भरी रहती है। 
  •   ओमिक्रोन में सांस लेने में नहीं होती कोई परेशानी

 एम्स के कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर एम्स के डॉ पुनेट मुसरा के अनुसार  COVID-19 के ज्यादातर मामलों में वायरस  का विकास पीड़ित व्यक्ति के फेफड़ों में होता है जिससे सांस लेने में समस्या होती है। लेकिन ओमिक्रॉन वायरस  फेफड़े की जगह गले में बढ़ता है। इसलिए इसमें निमोनिया होने की शिकायत नहीं होती। यही कारण है कि मरीज को सांस लेने में परेशानी नहीं होती है।

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