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नींद पर शायरी

Read Hindi Poetry and Hindi Kavita on various topics. In this selection of poems, you can read Neend Par Hindi Poetry. It contains the topics of sleep Hindi Poetry or I am sleeping Topic Poetry in Hindi Whatsapp Status Poetry and Hindi Quotes Poetry TikTok Status.

नींद पर शायरी
नींद पर शायरी

अकेले हम ही नहीं जागते हैं रातों में
उसे भी नींद बड़ी मुश्किलों से आती है
आग़ा जर्रार
۔
वो बचपने की नींद तो अब ख़्वाब हो गई
क्या उम्र थी, कि रात हुई और सो गए
परवीन शाकिर
۔
कौन देगा सुकून आँखों को
किस को देखूं कि नींद आ जाये
मुहम्मद अली
۔
मुझको शिकवा है अपनी आँखों से
तुम ना आए तो नींद क्यों आई
जिगर मुराद आबादी
۔
हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाऐंगे
अभी कुछ बेक़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ
क़तील शिफ़ाई
۔
जागने का अज़ाब सह सह के
अपने अंदर ही सो गया हूँ मैं
नामालूम
۔
मौत का एक दिन मुईन है
नींद क्यों रात-भर नहीं आती
ग़ालिब
۔

नींद पर शायरी


इक नींद मेरे ख़ाब को रखती है परेशां
इक ख़ाब मुझे चैन से सोने नहीं देता
शोज़ब काज़मी

उठो ये मंज़र-ए-शब ताब देखने के लिए
कि नींद शर्त नहीं ख़ाब देखने के लिए
इर्फ़ान सिद्दीक़ी
۔
आई होगी किसी को हिजर में मौत
मुझको तो नींद भी नहीं आती
अकबर इला आबादी
۔
बिन तुम्हारे कभी नहीं आई
क्या मरी नींद भी तुम्हारी है
जून ईलिया
۔
इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
हम ना सोए रात थक कर सो गई
राही मासूम रज़ा
۔
थी वस्ल में भी फ़िक्र जुदाई तमाम शब
वो आए तो भी नींद ना आई तमाम शब
मोमिन ख़ां मोमिन
۔

नींद पर शायरी

अकेले हम ही नहीं जागते हैं रातों में
उसे भी नींद बड़ी मुश्किलों से आती है
आग़ा जर्रार
۔
वो बचपने की नींद तो अब ख़्वाब हो गई
क्या उम्र थी, कि रात हुई और सो गए
परवीन शाकिर
۔
कौन देगा सुकून आँखों को
किस को देखूं कि नींद आ जाये
मुहम्मद अली
۔
मुझको शिकवा है अपनी आँखों से
तुम ना आए तो नींद क्यों आई
जिगर मुराद आबादी
۔
हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाऐंगे
अभी कुछ बेक़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ
क़तील शिफ़ाई
۔
जागने का अज़ाब सह सह के
अपने अंदर ही सो गया हूँ मैं
नामालूम
۔
मौत का एक दिन मुईन है
नींद क्यों रात-भर नहीं आती
ग़ालिब
۔

नींद पर शायरी


इक नींद मेरे ख़ाब को रखती है परेशां
इक ख़ाब मुझे चैन से सोने नहीं देता
शोज़ब काज़मी

उठो ये मंज़र-ए-शब ताब देखने के लिए
कि नींद शर्त नहीं ख़ाब देखने के लिए
इर्फ़ान सिद्दीक़ी
۔
आई होगी किसी को हिजर में मौत
मुझको तो नींद भी नहीं आती
अकबर इला आबादी
۔
बिन तुम्हारे कभी नहीं आई
क्या मरी नींद भी तुम्हारी है
जून ईलिया
۔
इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
हम ना सोए रात थक कर सो गई
राही मासूम रज़ा
۔
थी वस्ल में भी फ़िक्र जुदाई तमाम शब
वो आए तो भी नींद ना आई तमाम शब
मोमिन ख़ां मोमिन
۔

नींद पर शायरी


आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा
आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई
इक़बाल अश्हर
۔
कैसा जादू है समझ आता नहीं
नींद मेरी ख़ाब सारे आपके
इबन मुफ़्ती
۔
शाम से उनके तसव्वुर का नशा था इतना
नींद आई है तो आँखों ने बुरा माना है
नामालूम

मालूम थीं मुझे तेरी मजबूरियाँ मगर
तेरे बग़ैर नींद ना आई तमाम रात
नामालूम
۔
मुद्दतों बाद मयस्सर हुआ माँ का आँचल
मुद्दतों बाद हमें नींद सुहानी आई
इक़बाल अश्हर
۔
जागने वालो आओ दुख बांटें
नींद को यूँ ही रहम आएगा
फ़रेहा नक़वी

नींद पर शायरी


आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा
आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई
इक़बाल अश्हर
۔
कैसा जादू है समझ आता नहीं
नींद मेरी ख़ाब सारे आपके
इबन मुफ़्ती
۔
शाम से उनके तसव्वुर का नशा था इतना
नींद आई है तो आँखों ने बुरा माना है
नामालूम

मालूम थीं मुझे तेरी मजबूरियाँ मगर
तेरे बग़ैर नींद ना आई तमाम रात
नामालूम
۔
मुद्दतों बाद मयस्सर हुआ माँ का आँचल
मुद्दतों बाद हमें नींद सुहानी आई
इक़बाल अश्हर
۔
जागने वालो आओ दुख बांटें
नींद को यूँ ही रहम आएगा
फ़रेहा नक़वी

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