Home » Blog » नरेन्द्र मोदी के विकल्प क्या हैं और कौन हैं?

नरेन्द्र मोदी के विकल्प क्या हैं और कौन हैं?

नरेन्द्र मोदी
नरेन्द्र मोदी

कुछ भक्त गण और चाटुकार पत्रकार अक्सर यह सवाल करते हैं कि आख़िर नरेन्द्र मोदी(Narendra Modi) के विकल्प क्या है और कौन हैं? मुझे हैरत होती है इस सवाल से… हैरानी इसलिए कि जम्हूरियत में… प्रजातंत्र में इससे ज़्यादा बेवकूफ़ाना सवाल और कुछ भी नहीं हो सकता. समाजवादी विचारधारा के चिंतक किशन पटनायक कहते थे और उनकी एक किताब भी है ‘ विकल्पहीन नहीं है दुनिया.’ जी हाँ, प्रजातंत्र में कभी विकल्पहीनता की स्थिति नहीं होती. अगर प्रजातंत्र में विकल्प न हो तो प्रजातंत्र दम तोड़ देगा.

प्रजातंत्र में कोई अजर- अमर नहीं होता और होना भी नहीं चाहिए. लेकिन इन चाटूकारों को कौन समझाए कि विकल्प के दरवाज़े खुले हों, वही जम्हूरियत की ख़ुशबू है. क्या किसी ने सोचा था कि लाल बहादुर शास्त्री भी कभी प्रधानमंत्री होंगे? क्या किसी ने सोचा था कि नरसिम्हा राव कभी प्रधानमंत्री होंगे? और क्या बाजपेयी- आडवाणी के युग में कभी कोई नरेन्द्र मोदी के बारे में सोचा था? क़तई नहीं. नरेन्द्र मोदी का नाम तो किसी के सपने में भी नहीं आता होगा. लेकिन नरेन्द्र मोदी जी बाज़ाव्ता प्रधानमंत्री बने और दूसरी दफ़ा बने. इसलिए यह मान लेना कि नरेन्द्र मोदी के बाद अब कोई नहीं या उनका कोई विकल्प नहीं, यह मानसिक दिवालियेपन की अलामत है और कुछ भी नहीं.

आप ख़ुद ही देख लें कि रफ़्ता- रफ़्ता ब्रांड मोदी कैसे फीका पड़ रहा है और किस तरह भाजपा आज हताशा और निराशा में है. सन् 2014 में जो मोदी जी का नशा था, क्या वो हैंगओवर अब ख़त्म होता नज़र नहीं आ रहा? बिल्कुल साफ़ नज़र आ रहा है. बंगाल चुनाव में मोदी जी सहित भाजपा के सारे दिग्गजों ने पूरी ताक़त झोंक दी, नतीजा आपके सामने है.

अब यूपी चुनाव में जिस तरह से धर्म व मज़हब के नाम पर ध्रुवीकरण की पुरज़ोर कोशिश की जा रही है और जिस तरह से नफ़रती माहौल बनाया जा रहा है, उससे साफ़ है कि पाॅंच साल बाद इनकी ज़मीन दरक रही है. बंगाल में मोदी जी ‘ दीदी ओ दीदी’ बोलकर प्रधानमंत्री की पद की गरिमा को ठेस पहुॅंचाया, वही अभी योगी जी गर्मी उतार देंगे जैसी भाषा बोलकर मुख्यमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुॅंचा रहे हैं. हालांकि विपक्ष भी भाषा की गरिमा को खो रहा है और चर्बी उतारने जैसी बात कर रहा है. लेकिन आप तो बड़े पद पर हैं, आप पद की गरिमा को क्यों धूमिल कर रहे हैं.

दूसरी बात, ये हताशा नहीं तो और क्या है कि आज आपको जाट भी अपना नज़र आ रहा है, किसान भी अपने नज़र आ रहे हैं और वे किसान जिनको रौंदने में कोई कसर नहीं छोड़ा. सात सौ किसान मारे गए, उन्हें खालिस्तानी- पाकिस्तानी और न जाने क्या- क्या कहा गया.. मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने तो पूरी कलई ही खोल दी इनकी कि ये किसान क्या मेरे लिए मरे हैं… जी हाँ, वे नरेन्द्र मोदी जी की बात कर रहे थे. लेकिन बाद में नरेन्द्र मोदी जी को किसानों के हित में बनाए गए क़ानूनों को वापस करना पड़ा. आज अमित शाह समझा रहे हैं कि जाट व सिखों से उनका साढ़े छह सौ साल पुराना रिश्ता है. अब इसका मायने- मतलब वही समझें.

आज युवाओं में जिस तरह निराशा है, वह अप्रत्याशित है. पर्चा भरो- पर्चा लीक… यही खेल चल रहा है. आप भव्य विशाल राम मंदिर की बात कर रहे हैं और वे युवा पूछ रहे हैं कि रोज़गार कहाँ है? हर साल दो करोड़ युवाओं को रोज़गार देने का वायदा कहाँ गया? अभी रेलवे की नौकरी में जो घपला- घोटाला हुआ और जिस तरह युवाओं का रोष फूटा, उसे पूरे मूल्क ने देखा. ये युवा बदलाव चाहते हैं- उन्हें हिन्दू- मुस्लिम और सम्प्रदायवाद से कोई लेना- देना नहीं. इतना ज़बरदस्त एंटी इनकम्बेन्सी है यूपी में कि वो दिखाई पड़ रहा है और इसलिए भाजपाई हताशा में हैं. मैं यह नहीं कह रहा कि अखिलेश आएंगे तो कोई जादू होगा. लेकिन युवाओं का मूड जो है, वो मैं कह रहा हूँ.

यह देश नफ़रत से नहीं चलने वाला है. आप एक तरफ़ गाॅंधी को राजघाट पर फूल चढ़ाइए और दूसरी ओर गाॅंधी के क़ातिल गोडसे को ग्लोरिफ़ाई कीजिये, यह नहीं होगा. धर्म संसद में जिस तरह गाॅंधी को गाली दी गई, क्या हुकूमत से उसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठी? नहीं. आख़िर क्यों? जिस पटेल ने संघ को बैन किया था, उस पटेल को अपना बना रहे हैं. कौन – सी सियासत कर रहे हैं आप और किसको धोखा दिया जा रहा है? आज आप नेहरू को गाली दे रहे हैं. लेकिन नेहरू ने जितनी वैज्ञानिक- सामाजिक संस्थानें खड़ी की, उसका दशांश भी नहीं कर पाए हैं. हाँ, सबको बेचने का काम आपने ज़रूर किया है महोदय.

भक्त गण कहते हैं कि मोदी जी ने ऐतिहासिक काम किया है. ज़रूर किया है. पेट्रोल- डीज़ल सौ से ऊपर, घरेलू गैस की क़ीमत हज़ार रुपये और मंहगाई की मार अलग और पिछले पैंतालीस साल बेरोज़गारी दर सबसे ज़्यादा और अर्थ व्यवस्था की बात क्या करनी. 2014 के चुनाव में मोदी जी चुनावी भाषण में कहते थे कि आपलोगो जब वोट डालने जाएंगे तो सिलिंडर को प्रणाम करके जाएंगे और वे कहते थे कि मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में मंहगाई के म का भी ज़िक्र नहीं किया.

बातें लिखने के लिए बहुत है और बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी. आज यूपी में जिस तरह का नफ़रती माहौल बनाया जा रहा है, वह बेहद ख़तरनाक है. दरअस्ल, इनके पास इसके अलावे कुछ एजेण्डा ही नहीं है. ये जिन्ना की बात कर रहे हैं. लेकिन जिन्ना के मज़ार पर किसने जिन्ना को सेक्युलर बताया, इन्हें याद है कि नहीं? जसवंत सिंह ने अपनी किताब में जिन्ना को सेक्युलर बताया है, याद है कि नहीं? और पाकिस्तान में नवाज़ शरीफ़ के जन्म दिन में बिन बुलाए मोदी जी पाकिस्तान पहुँच गए थे, याद है कि नहीं? इस देश को आज़ादी दिलाने में सबकी अहम भूमिका है, चाहे हिन्दू हों, मुसलमान हों, सिख हों, सबकी भूमिका है. इसलिए इस देश को गोडसे का देश मत बनाइये. आख़िर कब तक हिन्दू- मुसलमान… हिन्दू- मुसलमान करते रहिएगा? लोग ऊब चुके हैं इस नफ़रती सियासत से.

लेखक: निलांशु रंजन

Pawan Toon Cartoon

Pawan Toon Cartoon /modi cartoon

Must Read

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>