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उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती को आज सुबह किया गया नज़रबंद

उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती
उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती

उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती को आज सुबह किया गया नज़रबंद कर दिया गया है।’गुपकर गठबंधन’ की ओर से केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करने की खबर के बाद हुई कार्यवाई।

खबर है कि आज सुबह नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती को उनके आवास पर ही नज़रबंद कर लिया गया है। आज तड़के दोनों राजनेताओं के आवास पर सुरक्षाकर्मियों का काफिला पहुंचा और उनके आवास को सील कर दिया गया है।

नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर एक फोटो शेयर किया है जिसमें उनके आवास के चारों ओर पुलिस की गाड़ी खड़ी है। ट्वीट में उन्होंने व्यंग करते हुए लिखा है कि ‘’ लोगों को जबरन घरों में कैद करने वाली जम्मू कश्मीर के पुरानी पुलिस के साथ आप सभी को गुड मॉर्निंग, नए साल 2022 में आप सभी स्वागत है। कुछ चीजें कभी नहीं बदलती। शांतिपूर्ण प्रदर्शन से डरने वाली सरकार, जो प्रजातांत्रिक मुहिम को रोकने के लिए पुलिस की ट्रकें खड़ी हैं।”

इधर पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने भी ट्वीट कर आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार हमें 15 बार नज़रबंद की हैं। पहले अनुच्छेद 370 को ख़त्म करके जम्मू-कश्मीर को टुकड़ों में बांट डाला। जम्मू-कश्मीर के लोग इसका जब जब विरोध करते हैं, सरकार डर जाती है। यह सरकार पूरी तरीके से असहिष्णु हो गई है।”

महबूबा मुफ़्ती को आखिर क्यों किया गया नज़रबंद ?

केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में नया परिसीमन शुरू किया है जिसके तहत विधानसभा की संख्या और क्षेत्र में बदलाव होने जा रहा है। शनिवार को केंद्र सरकार के इसी नीति के ख़िलाफ़ गुपकर गठबंधन विरोध प्रदर्शन करने वाला था। वहां के प्रशासन ने ऐतिहातन सुबह ही प्रदर्शन के शुरू होने से पहले ही इन राजनेताओं को उनके ही घरों में नजरबंद कर लिया।

क्या है ‘गुपकर गठबंधन’ ?

जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों ने आपस में मिलकर एक गठबंधन बनाया है जिसे ‘गुपकर गठबंधन’ कहा जाता है। इसमें जम्मू कश्मीर के सभी स्थानीय पार्टियां सम्मिलित हैं। ये सभी केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करती हैं।

क्या होता है परिसीमन ?

परिसीमन का सामान्य अर्थ सीमा निर्धारण करना होता है। सरकार आयोग गठित कर किसी भी क्षेत्र का सीमांकन करती है। किसी भी राज्य में विधानसभा या लोकसभा की सीटों की संख्या तथा प्रत्येक विधानसभा या लोकसभा सीट के अंदर आने वाले भौगोलिक क्षेत्र की सीमा निर्धारण करने वाले आयोग को परिसीमन आयोग कहते हैं। जम्मू कश्मीर के लिए गठित परिसीमन आयोग नए शिरे से विधानसभा की सीटों की संख्या तय कर रही है। गुपकर गठबंधन इसी परिसीमन का विरोध करने वाली थी कि पुलिस ने उन नेताओं को नज़रबंद कर लिया।

जम्मू कश्मीर के लिए गठित परिसीमन का क्यों हो रहा विरोध ?

नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला तथा पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती सहित राज्य की कई क्षेत्रीय पार्टियां नए परिसीमन व्यवस्था को “अस्वीकार्य विभाजन” बता रही है। विधानसभा क्षेत्रों की इस नई परिसीमन प्रक्रिया में विधानसभा में सीटों की संख्या 107 से बढ़कर 114 करने की बात कही गयी है। जिसमें 24 सीटें पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के लिए आरक्षित की गई है। इसके साथ ही राज्य के जम्मू क्षेत्र की सीटों को 6 से बढ़ाकर 43 कर दी गई हैं। इधर कश्मीर में केवल 1 सीट की बढ़ाई जा रही है। कश्मीर के केवल 1 सीट बढ़ाने का ही व्यापक विरोध किया जा रहा है क्योंकि यही इन पार्टियों की लोकप्रियता है। यहां अभी तक 47 सीट है जो बढ़कर 48 हो जाएगी। लेकिन यह जम्मू क्षेत्र के बढ़े सीटों की तुलना में कम है। जम्मू में भाजपा की लोकप्रियता मानी जाती है। यही विरोध का मूल कारण है।

पहली बार चुनाव में आरक्षण दी जाएगी

इस परिसीमन की सबसे खास बात यह है कि राज्य के विधानसभा चुनाव में पहली बार अनुसूचित जाति (SC) को चुनावी आरक्षण देने की व्यवस्था है। अभी तक वहां चुनाव में अनुसूचित जाति को आरक्षण नहीं दिया जाता था।

जानिए! कौन-कौन हैं परिसीमन आयोग के सदस्य ?

जम्मू कश्मीर के लिए गठित परिसीमन आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज हैं। इस बैठक में पांच सांसद सदस्य हैं। जिनमें तीन सांसद कश्मीर और दो जम्मू के हैं। पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई, मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्र शर्मा और राज्य चुनाव आयुक्त के के शर्मा इस आयोग के प्रमुख सदस्य हैं।

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