मदद पर शायरी

मदद पर शायरी

किसी को कैसे बताएं ज़रूरतें अपनी
मदद मिले ना मिले आबरू तो जाती है
नामालूम

हम चराग़ों की मदद करते रहे
और इधर सूरज बुझा डाला गया
मनीष शुक्ला

हमारे ऐब में जिससे मदद मिले हमको
हमें है आजकल ऐसे किसी हुनर की तलाश
नातिक़ गुलाव ठी

फ़र्ज़ है दरिया दिलों पर ख़ाकसारों की मदद
फ़र्श सहरा के लिए लाज़िम हुआ सेलाब का
मुनीरध शिकवा आबादी

हर बार मदद के लिए औरों को पुकारा
या काम लिया नारा-ए-तकबीर से हमने
ज़फ़र इक़बाल

नीरंग इशक़ आज तो हो जाये कुछ मदद
पर-फ़न को हम करें मुतहय्यर किसी तरह
पण्डित जवाहर नाथ साक़ी

समुंद्रों को भी हैरत हुई कि डूबते वक़्त
किसी को हमने मदद के लिए पुकारा नहीं
इफ़्तिख़ार आरिफ़

मदद पर शायरी

कुछ ना कहने से भी छिन जाता है एजाज़-ए-सुख़न
ज़ुलम सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है
मुज़फ़्फ़र वारसी

हर बार मदद के लिए औरों को पुकारा
या काम लिया नारा-ए-तकबीर से हमने
ज़फ़र इक़बाल

ना कुछ सितम से तेरे आह आह करता हूँ
मैं अपने दिल की मदद गाह गाह करता हूँ
शेख़ ज़हूर उद्दीन हातिम

तदबीर के दस्त-ए-रंगीं से तक़दीर दरख़शां होती है
क़ुदरत भी मदद फ़रमाती है जब कोशिश इंसां होती है
हफ़ीज़ बनारसी

मंज़िल मर्ग के आ पहुंचे हैं नज़दीक अब तो
कर मदद ए नफ़स बाज़पसीं थोड़ी सी
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

सहरा में हवस ख़ार-ए-मुग़ीलाँ की मदद से
बारे मिरा ख़ूँ हर ख़स-ओ-ख़ाशाक को पहुंचा
मिर्ज़ा मुहम्मद तक़ी हवस

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