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12 लावारिस कुत्तों के लिए 5,300 KM की दूरी सड़क मार्ग से तय किया

चन्द्रिका योल्मो लामा

हम में से बहुत लोगों के लिए जीवन जीने का मतलब परिवार की खुशहाली होती है। नौकरी-बिजनेस के जरिये पैसे कमाना और फिर खुशहाल या सफल जीवन जीना! जीवन जीने के इस तरीके में प्रकृति के प्रति मानव का कर्तव्य गौण हो जाता है। प्रकृति में हमारे ही तरह बसे पशु-पक्षियों के प्रति भी मानव की कुछ जवाबदेही बनती है पर उसे ज्यादातर लोग समझ ही नहीं पाते। घरों की दीवारों, छतों पर चहचहाती चिड़िया, सड़कों पर दौड़ते लावारिस मवेशी इन सबमे प्रति हमारा कुछ न कुछ कर्तव्य होता है। जीवन के इसी मर्म को समझते हुए लावारिस कुत्तों के लिए अपना जीवन समर्पित कर चुकी श्रीमती चन्द्रिका योल्मो लामा जी की एक कहानी कौतूहल से भरी है। 

चन्द्रिका योल्मो लामा को लावारिस कुत्तों से बहुत लगाव है

देश के जाने-माने एनिमल ऐक्टिविस्ट श्रीमती चन्द्रिका योल्मो लामा को लावारिस कुत्तों से बहुत लगाव है। बगैर किसी सरकारी संस्थाओं से सहयोग लिए अपने बल बुते वो दर्जनों लावारिस कुत्तों का पालन करती है। कुत्तों की उचित पोषण, उचित इलाज का बंदोबस्त करती हैं। उनके पति भारतीय सेना के उच्च अधिकारी हैं। नौकरी के सिलसिले में इनका अक्सर ट्रांसफर होता रहता है। ये जहां रहती हैं वहाँ ही लावारिस पशुओं खासकर कुत्तों की देखभाल करती हैं। और जब इनके पति का ट्रांसफर होता है तो वो सभी कुत्तों को उसी शहरों में लावारिस छोड़कर जाने के बजाय उसे अपने साथ नए शहर ले जाती है। 

समस्या खड़ी हो गयी कि कुत्तों को लेकर जाए कैसे


एक बार इनके पति की पोस्टिंग लखनऊ में थी, 2019 में इनका ट्रांसफर गोवा में हुआ। लखनऊ से गोवा की दूरी करीब 2,300 किलोमीटर की है। उस वक्त चन्द्रिका योल्मो लामा के पास दर्जन भर कुत्तें थे।  अब समस्या यह थी कि वो अगर इन्हें छोड़ कर जाती तो ये सारे कुत्ते पुनः सड़को पर आ जाते। लेकिन कुत्तों के साथ जाने की इजाजत न तो फ्लाइट से है न ही ट्रेन से। समस्या यह खड़ी हो गयी कि इन कुत्तों को ये लेकर जाए कैसे!


श्रीमती चन्द्रिका योल्मो लामा जी के कई करीबियों ने इन्हें सलाह दिया कि वो इन कुत्तों के मोह में न पड़े, ये लावारिस कुत्ते ही हैं इन्हें सड़कों पर छोड़ दे और चले जाएं। लेकिन लावारिस कुत्तों के प्रति इनका लगाव और पशुओं के प्रति  सेवा भाव ने इन्हें लोगों के सलाह को नजरअंदाज करने को प्रेरित किया। इन्होंने एक महत्वपूर्ण फैसले लिए जो किसी भी आम आदमी के लिए आश्चर्य से भरा है। इन्होंने सड़क मार्ग से प्राइवेट गाड़ियों के द्वारा लखनऊ से गोवा 2,300 किलोमीटर की दूरी तय करने का निश्चय किया ताकि गाड़ी में इन सभी कुत्तों को ले जा सके। उस यात्रा में ये पहले से पाले हुए कुत्तों को तो अपने साथ ले ही गयी साथ ही साथ 12 और लावारिस कुत्तों को भी अपने साथ ले गई। इसमे कई कुत्ते तो बीमार भी थे। इस 2,300 किलोमीटर की लंबी दूरी में जगह जगह कुत्तों को खिलाती, इलाज कराती लखनऊ से गोवा पहुँची।

लावारिस कुत्तों के प्रति इनका सेवा भाव एक मिसाल की भांति है


फिर 2020 में कुछ पारिवारिक काम के सिलसिले में इन्हें गोवा से सिलीगुड़ी आना पड़ा। गोवा से सिलीगुड़ी की दूरी 3,000 किलोमीटर की है। परिवार में बड़े होने के कारण माता-पिता के देखभाल की जिम्मेदारी इन पर ही आ गई। इस लिए इन्हें 2020 में गोवा से 3,000 किलोमीटर की दूरी तय कर के सिलीगुड़ी आना पड़ा। उस वक्त भी इन्होंने फ्लाइट या ट्रेन से आने के बजाय सड़क मार्ग से अपने सभी कुत्तों के साथ आने का निश्चय किया।

लावारिस कुत्तों के प्रति इनका सेवा भाव एक मिसाल की भांति है जो आपको शायद की किसी में देखने को मिल पाए। सबसे बड़ी बात यह है कि यह सभी काम ये अपने बल बुते करती है। इन्हें न तो कोई सरकारी सहायता मिलता है न ही किसी संस्था से कोई वित्तीय सहायता मिल रहा है।

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