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मध्यमवर्गीय परिवारों के आर्थिक हितों के प्रति लापरवाह है सरकार

narendra modi
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कोविड-19 के कारण देश भीषण आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने इस महामारी के प्रभाव से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कई तरह की राहत पैकेज की घोषणा की है। लेकिन इस राहत पैकेज से देश के मीडिल क्लास का हित अछूता है। सारथी कंसल्टेंसी सर्विसेज और thinkerbabu.com की ओर से “कोविड-19 के समय सरकारी नीतियों का मीडिल क्लास पर प्रभाव” विषय पर वेविनार का आयोजन किया गया जिसमें बिहार की जानी-मानी समाजसेवी श्रीमति रेणु सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल रही। इस वेविनार में मीडिल क्लास के उन समस्याओं पर चर्चा की गई जिसका समाधान सरकार सिर्फ नीति बनाकर कर सकती है लेकिन वो इन मसलों को नजरअंदाज करती आ रही है।

सरकार के पास मीडिल क्लास के लिए कोई नीति ही नहीं


मुख्य वक्ता श्रीमती रेणु ने कहा कि सरकार के पास मीडिल क्लास के लिए कोई नीति है ही नहीं। इसका मुख्य कारण यह है कि सरकार वास्तव में देश की अर्थव्यवस्था के प्रति संवेदनशील ही नहीं है। सरकार केवल कम्पनी मालिकों को आर्थिक तंगी से उबारना चाहती है इसलिए वो राहत पैकेज की घोषणा करती है। श्रीमति रेणु सिंह ने कहा कि मनरेगा देश की पुरानी योजना है। लेकिन वर्तमान सरकार इसके नाम पर गरीबों तक आर्थिक सहायता पहुचाने की खाना पूर्ति कर रही है। मनरेगा में मौजूद व्यापक धांधली ही इसका प्रमाण है।

उन्होंने छोटे स्कूलों कोचिंग संस्थानों के वित्तीय संकट की चर्चा करते हुए कहा कि एक तरह बड़े बड़े स्कूल लॉकडाउन अवधि में भी बस किराया तक वसूल रही है वही छोटे छोटे स्कूलों कोचिंग संस्थानों को ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने के बाद भी फीस नहीं मिल रहा है। अगर सरकार चाहती तो इस दोनो तरह की समस्याओं का समाधान कर सकती थी।  शिक्षकों, आंगनबाड़ी कर्मचारियों सहित कई सरकारी कर्मियों को सरकार अभी तक वेतन नहीं दी है। किसानों के प्रति सरकार की लापरवाह रवैया की चर्चा करते हुए रेणु सिंह ने कहा कि लॉक डाउन में सरकार ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के कुछ कामों के जरिये किसानों को मजदूरों में परिवर्तित कर दिया गया क्योंकि किसानों के लिए किसी भी तरह की राहत की घोषणा नहीं कि गयी।


श्रीमती रेणु सिंह ने कहा कि सरकार पर राजनीतिक महत्वाकांक्षा का भूत इस कदर सवार है कि वो सिर्फ चुनाव पर ही ध्यान दे रही है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच विधानसभा चुनाव का आयोजन किसी भी आम इंसान के समझ से परे है। एक तरफ कोरोना संक्रमित इलाज के अभाव में अस्पतालों के गेट पर तपड तड़प कर दम तोड़ रहे है वही दूसरी ओर सरकार सोशल गैदरिंग को बढ़ाने के लिए चुनाव करवाना चाहती है।

 बिहार की चर्चित युवा समाज सेवी हैं रेणु सिंह


श्रीमती रेणु सिंह बिहार की जानी मानी समाज सेविका हैं। बिहार के ग्रामीण इलाकों की समस्याओं तथा किसानों की समस्याओं के लिए सतत प्रयासरत रहती है। वर्तमान समय में रेणु सिंह बिहार के किसानों की प्रमुख आवाज है। किसानों की समस्या को राजकीय स्तर तक ले जाती है ताकि राजनीति के शोरगुल में किसान हमेशा समस्याओं से घिरा ही न रहे। वतर्मान में रेणु सिंह ऐसे समाजसेविका हैं जो घर घर दस्तक दे कर लोगों से उनकी समस्याएं पूछ रही हैं और यथासाध्य उसके समाधान के लिए प्रयासरत रहती है। यही कारण है कि किसानों के साथ साथ युवाओं और महिलाओं में इनकी लोकप्रियता बढ़ रही है।


सारथी कंसल्टेंसी सर्विसेज की ओर से आयोजित था वेविनार


इस वेविनार का आयोजन दिल्ली स्थित सारथी कंसल्टेंसी सर्विसेज के संस्थापक औऱ निर्देशक सुश्री सुभाषिनी रतन की पहल पर किया गया था। उन्होंने कहा कि मीडिल क्लास देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी के समान है। ऐसे में यह समझना आवश्यक है कि मीडिल क्लास किन चुनौतियों से गुजर रहा है। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता पर सभी वक्ताओं के प्रति आभार प्रकट किया तथा  भाग लेने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि हम देश की अनछुए समस्याओं पर आगे भी वेविनार करते रहेंगे। 

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