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जानिए, वो 4 कारण जो बता रहा है कि रूस यूक्रेन युद्ध हार रहा है!

जानिए, वो 4 कारण जो बता रहा है कि रूस यूक्रेन युद्ध हार रहा है!
जानिए, वो 4 कारण जो बता रहा है कि रूस यूक्रेन युद्ध हार रहा है!

कैसे समझा जाए कि रूस (RussiaUkraineConflict) मिसाइलें बरसा कर भी यूक्रेन में हार रहा है। रूस को लगता था कि यूक्रेन में सैन्य कार्यवाई के जरिये कुछ ही दिनों में यूक्रेन पर कब्जा कर लेगा । यूरोपीय देशों के खिलाफ उसकी विदेश नीति को बल मिलेगा। लेकिनऐसा कुछ भी होता नहीं दिखाई पड़ रहा है। क्यों रूस की नीति असफल होती दिखाई दे रही है।

यही कारण है कि वह अपने सैनिकों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है। अन्य घातक हथियारों के साथ-साथ परमाणु हथियार का प्रयोग भी शामिल है। यूक्रेन के लगभग सभी शहरों में लगातार बमबारी हो रही है। यहां बडी-बडी इमारतें खंडहर में तब्दील होती जा रही है। लेकिन इस बीच यह समझना रोचक होगा। क्यों अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कहा जा रहा है कि रूस यूक्रेन में अपने मंसूबों में असफल हो रहा है। आइए, हम इन मुद्दों पर विचार करें।

कीएव पर कब्जा करने में असफल हो रहा रूस

पुतिन को यकीन था कि हमला कर के वह राजधानी कीएव (RussiaUkraineConflict) पर कब्जा कर लेगा। कीएव पर कब्जा करने के बाद कठपुतली सरकार स्थापित कर लेगा। लेकिन युद्ध के छठे दिन बीत जाने के बाद भी ऐसा नहीं हो पाया। यूक्रेनी सैनिकों केसाथ यहाँ की जनता भी एकजुट हो कर हथियार उठा ली है। जिसके कारण रूसी सैनिक राजधानी पर कब्जा नहीं कर पाए हैं। यूक्रेनी सैनिकों ने दावा किया है कि रूस के 5,300 से ज्यादा सैनिकों को मार डाली है। अगर यूक्रेनी सैनिकों का दावा सही है। इससे यही प्रमाणित होता है कि रूसी सैनिकों के लिए शहर पर कब्जा करना आसान नहीं है।

यूक्रेन के जरिए पश्चिमी देशों की एकता को तोड़ने में असफल

इतनी तेजी से यूक्रेन पर इसलिए हमला किया कि पुतिन चाहते हैं। कि वह पश्चिमी देशों की एकता को तोड़ सके। रूसी राष्ट्रपति पुतिन यह चाहते हैं कि उनके देश के पड़ोसी देशों पर यूरोप का प्रभाव कमजोर हो जाए। उन्हें यकीन था कि कीएव को कब्ज़े में लेने के बाद पश्चिमी देश डरकर विभाजित हो जाएंगे. यूक्रेन पर उनका दावा स्वीकार कर लेंगे। लेकिन इसके ठीक विपरीत यूक्रेन ने ही पश्चिमी देशों का दिल जीत लिया। पश्चिमी देशों में जर्मनी ने तो यूक्रेन के पक्ष में रूसी सरकार की इतनी कठोर निंदा की है। जिसकी उम्मीद पहले नहीं थी।

रूस की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है

भले ही यूक्रेन (RussiaUkraineConflict) पर बमबारी कर वहां के इमारतों, सरकारी कार्यालयों और नागरिक आवासों को क्षतिग्रस्त कर रहा है. लेकिन रूस की अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित रही है। रूसी अर्थव्यवस्था के लिए यह चुनौती से भरा वक्त है। इस बात का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुतिन के बड़े सहयोगी चीन में भी अब चिंता जाहिर की है. पश्चिमी देशों में बढ़ा ग़ुस्सा चीन के ख़िलाफ़ भी जा सकता है . जिससे चीनी अर्थव्यवस्था को गंभीर नुक़सान हो सकते हैं। जहां तक बात यूक्रेन की अर्थव्यवस्था की है तो अगर रूस वहां कठपुतली सरकार बनाने में असफल रही . तो नेटो देश और अमेरिका यूक्रेन के आर्थिक मदद करने के लिए आगे बढ़ जाएंगे। लेकिन रूस को अपने ही दम पर अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करनी पड़े।

यूक्रेन युद्ध के बाद नेटो का मजबूत होना

पुतिन यूक्रेन युद्ध के जरिए नेटो को कमजोर करना चाहते थे. लेकिन जो हो रहा है वह इसके विपरीत हो रहा है। यूक्रेन की स्थिति देखने के बाद कई औऱ देश नेटो का सदस्य बनना चाहते हैं. जिससे नेटो और मज़बूत हो सकता है। खबर है कि फ़िनलैंड और स्वीडन दोनों अपनी सुरक्षा के लिए नेटो में शामिल होने वाले हैं।

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