किताब पर शायरी

किताब पर शायरी

ये जो ज़िंदगी की किताब है ये किताब भी क्या किताब है
कहीं एक हसीन सा ख़ाब है कहीं जान-लेवा अज़ाब है
राजेश रेड्डी
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कोई सूरत किताब से निकले
याद सूखे गुलाब से निकले
समीर कबीर
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जब भी कोई किताब लिखूँगा
तेरे नाम इंतिसाब लिखूँगा
मुईन शादाब
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उसका लहजा किताब जैसा है
और वो ख़ुद गुलाब जैसा है
जाज़िब क़ुरैशी
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दर्द की इक किताब है कोई
ज़िंदगी इज़तिराब है कोई
पूनम यादव

खुली किताब के सफ़े उलटते रहते हैं
हवा चले ना चले दिन पलटते रहते हैं
गुलज़ार
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वो हैरतों की मुकम्मल किताब लिख देना
सवाल करने से पहले जवाब लिख देना
क़मर संभली
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किताब पर शायरी


किताब पढ़ते रहे और उदास होते रहे
अजीब शख़्स था जिसके अज़ाब ढोते रहे
शमीम हनफ़ी
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कुतर गया है मेरी उम्र की किताब कोई
मिला कहीं से भी सालिम, ना आज बाब कोई
मर्यम ग़ज़ाला
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अपनी किताब-ए-उम्र का अंजाम लिख दिया
पहले वर्क़ पे मैंने तेरा नाम लिख दिया
मासूम अंसारी

किताब-ए-दिल के वर्क़ जो उलट के देखता है
वो कायनात को औरों से हट के देखता है
शाहिद जमाल
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मेरी उरूज की लिखी थी दास्ताँ जिसमें
मेरे ज़वाल का क़िस्सा भी उस किताब में था
विकास शर्मा राज़
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किताब-ए-उम्र में इक वो भी बाब होता है
हर इक सवाल जहां ला-जवाब होता है
सीमाब सुलतानपुरी
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किताब-ए-आरज़ू के गुम-शुदा कुछ बाब रखे हैं
तेरे तकिए के नीचे भी हमारे ख़ाब रखे हैं
ग़ुलाम मुहम्मद क़ासिर
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किताब पर शायरी


मुनाफ़क़त का निसाब पढ़ कर मोहब्बतों की किताब लिखना
बहुत कठिन है ख़िज़ां के माथे पे दास्तान-ए-गुलाब लिखना
आफ़ताब हुसैन

हमारा हर दिन किताब का एक बाब है और
किताब वहशत की दास्तानों पे मुश्तमिल है
आजिज़ कमाल राना
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कभी आँखें किताब में गुम हैं
कभी गुम हैं किताब आँखों में
मुहम्मद अलवी
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वरक़-वरक़ सा बिखरता किताबे ग़म जैसा
मिलेगा शहर में शायद ही कोई हम जैसा
साजिद रईस वारसी
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वो इक किताब जो मंसूब तेरे नाम से है
इसी किताब के अंदर कहीं कहीं हूँ में
राहत इंदौरी
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ये मेज़ ये किताब ये दीवार और मैं
खिड़की में ज़र्द फूलों का अंबार और मैं
ज़ुल्फ़क़ार आदिल

हर शख़्स है इश्तिहार अपना
हर चेहरा किताब हो गया है
क़ैसर अलजाफ़री
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मेरे दिल की किताब मत पढ़ना
डगमगा जाऐंगे तुम्हारे ख़्याल
अजीत सिंह बादल

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