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जो ठान लेती हैं वो कर दिखाती हैं

प्रीति जायसवाल

अपनी निजी प्रगति की होड़ में जीवन व्यतीत करने वाले तो बहुतेरे मिल जायेंगे लेकिन दूसरों के जीवन की ‘आह’ मिटाते हुए जीवन जीने में ही असली बड़प्पन है। शहर हो या गांव, हर गली में भीख मांग कर भूख के लिए संघर्ष करते बच्चे बड़े अक्सर मिल जाते हैं। लेकिन हम  सम्पन्न लोगों में से शायद ही कोई होगा जो इनकी परवाह करें। देश की धर्म नगरी बनारस में नर नारायण की उपासना करने वाली एक ऐसी युवती हैं जिन्होंने संस्थागत तरीके से काम कर अब तक सैकड़ों भूखों, उपेक्षित वृद्धों, अनाथ बच्चों के जीवन को सवारा है, उन सबकी आजीविका की व्यवस्था की है।

सैकड़ों अनाश्रितों के जीविका की व्यवस्था की


बनारस की प्रीति जायसवाल ने अपने बल-बुते बगैर किसी सरकारी सहायता के सैकड़ों अनाश्रितों के जीविका की व्यवस्था की है। उन्होंने समेकित रूप से उत्तर प्रदेश के कई वृद्धाश्रमों, अनाथालयों  को आर्थिक सहायता प्रदान की है।  इन्होंने एक नई पहल शूरू की है। होली-दीपावली जैसे त्योहारों पर इन वृद्धाश्रमों-अनाथालयों में जा कर उनके बीच उत्सव मनाती हैं। साथ ही सम्पन्न घरों के लोगों को भी ऐसा करने के लिए उत्साहित करती है। ताकि उन उपेक्षित लोगों को अपनों का अहसास हो सके।
प्रीति जायसवाल ने दर्जनों गांवों में जाकर महिलाओं को कुटीर उद्योग चलाने की ट्रेनिंग दी है। स्कूल-कॉलेज के छात्र छात्राओं को प्रोत्साहित कर गांव ले जाती हैं जो इनके साथ गांवों में जाकर प्रोफेशनल तरीके से कुटीर उद्योग चलाने की ट्रेनिंग देते हैं। इनके इस प्रयास से आज गांवों की सैकड़ों महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो चुकी हैं।

महिलाओं के लिए स्वतत्रंता का असली मतलब उनके आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने से हैं


प्रीति जायसवाल का मानना है कि महिलाओं के लिए स्वतत्रंता का असली मतलब उनके आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने से हैं। जब तक कोई महिलाएं अपने बल बुते पैसा नहीं कमाती हैं तब तक उनकी आजादी का कोई मतलब नहीं है। समाज में महिलाओं के लिए व्याप्त नजरिए से प्रीति जायसवाल को शिकायत है। वो बताती है कि जब कोई महिला पुरुष प्रधान काम को बखूबी करने लगती है, आत्मनिर्भर हो कर जीने लगती है तब समाज उसके चरित्र पर उंगली उठाना शुरू कर देती है। आखिर समाज महिला की योग्यता को क्यों स्वीकार नहीं करना चाहती है। प्रीति जायसवाल को सबसे दुख तब होता है जब कोई महिला भी पुरुष की तरह सोच रख कर किसी आत्मनिर्भर बनने की राह में निकल चुकी महिला के चरित्र पर उंगली उठाती है। इसलिए ये समाज में बदलाव की आवश्यकता को महसूस करती हैं। 
हालांकि प्रीति जायसवाल को अपने पति और ससुराल का भरपूर समर्थन और सहयोग मिला है। पति के सहयोग के कारण ही वो आज राजनीति में भी सक्रिय हैं। वो इस बात को स्पष्ट स्वीकार करती हैं कि अगर पति का सहयोग नहीं मिलता तो जीवन की चुनौतियां बहुत बढ़ जाती। लेकिन तब भी वो लोगों के लिए काम करने में पीछे नहीं हटती।

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