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इश्क़ और मुहब्बत शायरी

Read Hindi Poetry and Hindi Kavita on various topics. In this selection of poems, you can read Pyaar Par Hindi Poetry. It contains the topics of Love Hindi Poetry or Isq Topic Poetry in Hindi Whatsapp Status Poetry and Hindi Quotes Poetry TikTok Status.

शायरी
शायरी

मुहब्बत बहुत सुन्दर और अनोखा एहसास है। जब हम किसी के प्यार मैं होते हैं तो उसको सुन्दर लफ़्ज़ों मैं अपने महबूब तक पहुँचाना चाहते हैं। इसका सबसे अच्छा माध्यम शाइरी है। शाइरी आपके लिए एक सबक की तरह है, आप इसके साथ प्यार में जीने के तरीके और जुदाई और मिलन से गुजरने के तरीके भी सीखेंगे। यह शाइरी का पहला ऐसा सुंदर संग्रह है जिसमें हर रंग, हर मनोदशा और प्यार के हर एहसास को समेटे हुए शेर का संग्रह किया गया है। इन्हें पढ़ें और अपने प्रियजनों के साथ साझा करें।

बांध लें हाथ पे सीने पे सजा लें तुमको
जी में आता है कि तावीज़ बना लें तुमको
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फिर तुम्हें रोज़ सँवारें तुम्हें बढ़ता देखें
क्यों ना आँगन में चम्बेली सा लगा लें तुमको
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जैसे बालों में कोई फूल चुना करता है
घर के गुल-दान में फूलों सा सजा लें तुमको
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क्या अजब ख़्वाहिशें उठती हैं हमारे दिल में
कर के मुन्ना सा हवाओं में उछालें तुमको
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इस क़दर टूट के तुम पे हमें प्यार आता है
अपनी बाँहों में भरें मार ही डालें तुमको
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कभी ख़ाबों की तरह आँख के पर्दे में रहो
कभी ख़ाहिश की तरह दिल में बुला लें तुमको
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है तुम्हारे लिए कुछ ऐसी अक़ीदत दिल में
अपने हाथों में दुआओं सा उठा लें तुमको
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जान देने की इजाज़त भी नहीं देते हो
वर्ना मर जाएं अभी मर के मना लें तुमको
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जिस तरह रात के सीने में है महताब का नूर
अपने तारीक मकानों में सजा लें तुमको
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इश्क़ और मुहब्बत शायरी

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
ना जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाये
बशीर बदर
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रंजिश ही सही दिल ही दिखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
अहमद फ़राज़
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उसकी याद आती है सांसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
राहत इंदौरी

और क्या देखने को बाक़ी है
आपसे दिल लगा के देख लिया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है
इशक़ कीजिये फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
निदा फ़ाज़ली
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ना जी भर के देखा ना कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
बशीर बदर
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी
दिल नहीं लग रहा मुहब्बत में
जून एलिया

आपके बाद हर घड़ी हमने
आपके साथ ही गुज़ारी है
फ़िराक़-गोरखपुरी
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करूँगा क्या जो मुहब्बत में हो गया नाकाम
मुझे तो और कोई काम भी नहीं आता
ग़ुलाम मुहम्मद क़ासिर
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इशक़ पर-ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब
कि लगाए ना लगे और बुझाए ना बने
मिर्ज़ा ग़ालिब
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तुम मुहब्बत को खेल कहते हो
हमने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
बशीर बदर
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मुझे अब तुमसे डर लगने लगा है
तुम्हें मुझसे मुहब्बत हो गई क्या
जून एलिया

ग़म और ख़ुशी मैं फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
मैं दिल को उस मुक़ाम पर लता चला गया

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